आइजोल, 2 फरवरी। फरवरी 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद विभिन्न चरणों में अपने देश से भागकर मिजोरम में शरण लेने वाले लगभग 30,900 म्यांमार नागरिकों (महिलाओं और बच्चों सहित) में से लगभग 90 प्रतिशत का बायोमेट्रिक विवरण अब तक दर्ज किया जा चुका है।
गृह विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मिजोरम के 11 जिलों में शरण लेने वाले लगभग 30,900 म्यांमार नागरिकों में से 27,810 से अधिक लोगों का बायोमेट्रिक पंजीकरण पूरा हो चुका है।
अधिकारियों के अनुसार, 2,375 बांग्लादेशी शरणार्थियों में से लगभग 15 प्रतिशत का बायोमेट्रिक विवरण अब तक तीन जिलों - लॉंग्टलाई, लुंगलेई और सेरछिप में दर्ज किया जा चुका है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की सलाह के बाद, विदेशी पहचान पोर्टल और बायोमेट्रिक नामांकन प्रणाली के माध्यम से बायोमेट्रिक नामांकन प्रक्रिया चल रही है।
राज्य के 11 जिलों में से, मध्य मिजोरम के सेरछिप जिला प्रशासन ने 30 जुलाई को शरणार्थियों के लिए बायोमेट्रिक पंजीकरण अभियान शुरू किया, जिसके बाद शेष 10 जिलों ने भी प्रक्रिया शुरू कर दी।
आइजोल जिला और लुंगलेई और सेरछिप जिलों में बायोमेट्रिक पंजीकरण प्रक्रिया शत प्रतिशत पूरी हो चुकी है।
चम्फाई जिला में अभी भी सबसे अधिक शरणार्थी हैं, जिनकी संख्या लगभग 12,000 है।
इस बीच, गृह विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पड़ोसी देश के चिन राज्य में नए सिरे से शुरू हुई अशांति के कारण पिछले सप्ताह म्यांमार से लगभग 240 नए शरणार्थी मिजोरम में दाखिल हुए।
इनमें से अकेले चम्फाई जिले में पिछले सप्ताह 231 शरणार्थी दर्ज किए गए, जबकि शेष ने हनहथियाल जिले में शरण ली।
म्यांमार और बांग्लादेश दोनों के शरणार्थियों को पहाड़ी राज्य के सभी 11 जिलों में निर्धारित शिविरों के साथ-साथ रिश्तेदारों के घरों और किराए के मकानों में आश्रय दिया गया है।
एक अधिकारी ने बताया कि शिविरों में रहने वाले शरणार्थियों से बायोमेट्रिक विवरण एकत्र करना आसान है, लेकिन सैकड़ों दूरस्थ गांवों में फैले रिश्तेदारों के घरों और किराए के मकानों में रहने वालों के लिए यह प्रक्रिया अधिक चुनौतीपूर्ण है।