पटना नीट छात्रा की संदिग्ध मौत: CBI जांच को मिली हरी झंडी, हाईकोर्ट ने पिता की याचिका खारिज की

नीट छात्रा की मौत: सीबीआई को मामला सौंपे जाने के बाद हाईकोर्ट ने पिता की याचिका खारिज की


पटना, 2 फरवरी। पटना हाईकोर्ट ने सोमवार को पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत नीट परीक्षार्थी के पिता द्वारा दायर एक आपराधिक याचिका पर सुनवाई की और बिहार सरकार द्वारा जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपे जाने की सूचना मिलने के बाद मामले को खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा की एकल पीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि चूंकि मामला अब सीबीआई को सौंप दिया गया है, इसलिए इस स्तर पर आगे किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सीबीआई जांच में कोई खामी पाई जाती है, तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत में अपील करने के लिए स्वतंत्र होगा।

सुनवाई के दौरान, बिहार सरकार ने अदालत को सूचित किया कि सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ले ली है और उससे विस्तृत जांच करने और उचित समय में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की उम्मीद है।

इससे पहले, न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए एक याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद आज इस मामले पर सुनवाई हुई।

याचिका में गृह एवं स्वास्थ्य विभागों के प्रधान सचिवों, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), पटना एसएसपी और चित्रगुप्त नगर पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर को प्रतिवादी बनाया गया है।

शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक और तीन निजी अस्पतालों को भी प्रतिवादी बनाया गया है।

मृतक लड़की के पिता ने न्याय की गुहार लगाते हुए हाईकोर्ट का रुख किया और बताया कि उनकी बेटी की मृत्यु 11 जनवरी, 2026 को नीट परीक्षा की तैयारी के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी।

अपनी याचिका में उन्होंने दावा किया कि बार-बार प्रयास करने के बावजूद, उनकी बेटी की मृत्यु के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान और उन्हें दंडित करने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने मांग की कि जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में की जाए, या वैकल्पिक रूप से सीबीआई जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंप दी जाए।

यह याचिका अधिवक्ता अलका वर्मा द्वारा जनहित याचिका (पीआईएल) के रूप में दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस जांच किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है, जिससे भ्रम और अविश्वास पैदा हुआ है।

पीआईएल में हाईकोर्ट से हॉस्टलों, विशेष रूप से महिला हॉस्टलों में सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने और सभी निर्धारित नियमों और विनियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया गया।
 
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