चेन्नई में इस हफ्ते तस्माक की खाली बोतल वापसी योजना फिर शुरू, विरोध के बाद लौटेगी नए रंग में

तस्माक इस हफ्ते चेन्नई में खाली शराब की बोतलें वापस खरीदने की स्कीम करेगा फिर से शुरू


चेन्नई, 2 फरवरी। दुकान कर्मचारियों के विरोध के चलते अस्थायी रूप से स्थगित की गई तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (तस्माक) की खाली शराब की बोतल वापस खरीदने की योजना इस सप्ताह के अंत तक चेन्नई में फिर से लागू की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि पहले चरण में सामने आई परिचालन संबंधी चुनौतियों की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है, ताकि इस बार योजना को अधिक सुचारू ढंग से लागू किया जा सके।

दरअसल, चेन्नई में इस योजना को उस समय निलंबित करना पड़ा था, जब तस्माक कर्मचारियों ने अपर्याप्त सुविधाओं और बढ़ते कार्यभार का हवाला देते हुए शराब की दुकानों को बंद कर दिया था और डिपो स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया था।

कर्मचारियों का कहना था कि मौजूदा व्यवस्था में खाली बोतलों के संग्रह, भंडारण और परिवहन की जिम्मेदारी निभाना बेहद मुश्किल है।

इस बीच मद्रास उच्च न्यायालय ने तस्माक को फरवरी के अंत तक इस योजना से जुड़ी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत में मामला लंबित रहने के बावजूद तस्माक अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे फरवरी के दूसरे सप्ताह से पहले चेन्नई में इस योजना को दोबारा लागू करने की तैयारी कर रहे हैं।

तस्माक के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले अनुभवों से सबक लिया गया है। इस बार योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले इसे उत्तरी, मध्य और दक्षिणी चेन्नई में एक साथ लागू करने की कोशिश की गई थी, जिससे भ्रम और संचालन में दिक्कतें आईं, जबकि अब एक सप्ताह के भीतर तीनों क्षेत्रों को क्रमवार कवर किया जाएगा।

बाय-बैक योजना के तहत शराब खरीदते समय ग्राहकों से प्रत्येक बोतल पर 10 रुपए अतिरिक्त लिए जाते हैं। बाद में जब ग्राहक खाली बोतल को निर्धारित तस्माक आउटलेट या संग्रहण केंद्र पर लौटाता है, तो यह राशि उसे वापस कर दी जाती है। यह योजना राज्य के अन्य हिस्सों में पहले से लागू है और वहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

यह पहल मूल रूप से पहाड़ी और वन क्षेत्रों में शुरू की गई थी, जहां खुले में फेंकी गई शराब की बोतलें वन्यजीवों, खासकर हाथियों और अन्य जानवरों के लिए गंभीर खतरा बन रही थीं। टूटे हुए कांच से जानवरों के घायल होने की आशंका को देखते हुए सरकार ने इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम माना और बाद में पूरे राज्य में इसका विस्तार किया।

श्रमिकों का विरोध अब भी जारी है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा स्टाफ पहले से ही अत्यधिक कार्यभार से जूझ रहा है और खाली बोतलों के प्रबंधन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं है। उनका तर्क है कि प्रक्रिया के संचालन के लिए किसी अलग एजेंसी को नियुक्त किया जाना चाहिए।

एआईसीटीई से संबद्ध तस्माक श्रमिक संघ के महासचिव धनसेकरन ने स्पष्ट किया कि संघ के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कर्मचारियों के सहारे इस योजना को लागू करना व्यावहारिक नहीं है और बिना समर्पित एजेंसी और सुविधाओं के कर्मचारियों पर बोझ बढ़ेगा।
 

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