कोलकाता, 2 फरवरी। कलकत्ता हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने सोमवार को पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस दोनों को विपक्षी पार्टियों के चुने हुए प्रतिनिधियों के सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने पिछले साल अक्टूबर में कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट से दखल देने की मांग की थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भाजपा के विधायकों और सांसदों, जिनमें कुछ केंद्रीय राज्य मंत्री भी शामिल हैं, के सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों को सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से बेवजह दुश्मनी और विरोध का सामना न करना पड़े।
मामले की सुनवाई के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने कोलकाता पुलिस और पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि वे विपक्षी पार्टियों के चुने हुए जन प्रतिनिधियों के सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करें। बेंच ने राज्य और शहर की पुलिस को यह भी निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई की तारीख 18 फरवरी तक इस मामले में कोर्ट के निर्देश का सख्ती से पालन करें।
नेता विपक्ष ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि भाजपा के चुने हुए जन प्रतिनिधियों के सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों को अक्सर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से दुश्मनी, हिंसा और विरोध का सामना करना पड़ता है। अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रम के बारे में पुलिस को पहले से सूचना देने के बावजूद ऐसी दुश्मनी सामने आई। उन्होंने याचिका में यह भी दावा किया कि ऐसी घटनाओं ने राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस और प्रशासन की विफलता को उजागर किया है। उनके अनुसार, 2021 में राज्य में पिछले विधानसभा चुनावों के बाद से ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं।
बता दें कि 2021 से विपक्ष के नेता के काफिले पर भी कई बार हमला हुआ है, जिसका आरोप सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर लगा है। इन हमलों के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। पिछले साल भाजपा के लोकसभा सांसद खगेन मुर्मू और पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा की विधायक दल के मुख्य सचेतक शंकर घोष के काफिले पर भी हमला हुआ था, जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।