राज्यसभा में दिग्विजय सिंह गरजे: देश में बिगड़ता सौहार्द, बढ़ती आर्थिक असमानता और अल्पसंख्यकों पर अन्याय क्यों

सामाजिक सौहार्द और समरसता बिगड़ रही, आर्थिक असमानता बढ़ रही: दिग्विजय सिंह


नई दिल्ली, 2 फरवरी। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सोमवार को धन्यवाद प्रस्ताव के तहत चर्चा हुई। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने इस पर बोलते हुए कहा कि आज जिस देश में सबसे बड़ी समस्या यह है कि सामाजिक सौहार्द और समरसता बिगड़ रही है। इसके साथ ही आर्थिक असमानता बढ़ रही है।

उन्होंने सरकार से कहा कि संविधान में सबको समान अधिकार मिले हैं, लेकिन क्या अल्पसंख्यक समुदाय को आप न्याय दिलवा पा रहे हैं? धर्म को देखकर लोगों के घरों को बुलडोजर से गिराया जा रहा है। दोषी को दंड मिले, लेकिन परिवार के लोगों ने क्या किया है?

दिग्विजय ने कहा कि उमर खालिद व शरजील इमाम 4 वर्षों से जेल में बंद हैं और आज तक चार्जशीट भी पेश नहीं की गई। उन्होंने हेट स्पीच का मुद्दा उठाया और कहा कि क्या आप असम के मुख्यमंत्री के बयान पर उनसे इस्तीफा मांगेंगे? दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक जैसा व्यक्ति जिसने लद्दाख में अपना एक विशेष स्थान हासिल किया है, आखिर क्या कारण है कि उनको भी आज जेल में बंद किया गया है?

दिग्विजय सिंह ने कहा कि सोनम वांगचुक की केवल एक मांग थी कि छठी अनुसूची लागू करने के लिए जो वादा चुनाव में किया गया था उसे पूरा किया जाए। वे उसकी मांग कर रहे थे। बिना किसी कारण के सोनम वांगचुक सौ दिन से गिरफ्तार हैं।

दिग्विजय ने प्रश्न करते हुए कहा कि क्या ऐसी स्थिति में सबके साथ न्याय हो रहा है। सबके विकास के बारे में इतना कहना चाहता हूं कि आर्थिक असमानता बढ़ रही है। आज की असमानता का ब्रिटिश शासन के समय से भी बदतर हो चुकी है।

उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में लगभग 10 प्रतिशत व्यक्ति लगभग 58 प्रतिशत राष्ट्रीय आय प्राप्त करते हैं, जबकि निचले 50 प्रतिशत व्यक्तियों को केवल 15 प्रतिशत मिल पाता है। जहां 10 प्रतिशत व्यक्तियों के पास 65 प्रतिशत संपत्ति है, वहीं 50 प्रतिशत के पास 6.4 प्रतिशत संपत्ति है।

दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में कहा कि हमारे कॉर्पोरेट जो टैक्स देते हैं उससे ज्यादा आम आदमी आज टैक्स भर रहा है। ये सरकार गरीब विरोधी है, मजदूर विरोधी व किसान विरोधी है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग परेशान हैं।

उन्होंने कहा कि जहां आज संवैधानिक अधिकारों को कम किया जा रहा है, वहीं कर्तव्यों को अधिक महत्व देने का प्रयास किया जा रहा है। कर्तव्यों के प्रति हम सजग हैं, लेकिन हमारे अधिकारों को इसमें कम नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि काला धन वापस लाने की बात की जाती थी, लेकिन अब अधिकांश रोजगार आउटसोर्सिंग के माध्यम से दिया जा रहा है, जिसमें नौकरी की गारंटी तक नहीं है।

उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में हम लोग कहां पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि चीन ने भारत की लगभग 2 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा किया हुआ है। उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में 65 में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर चीन ने कब्जा कर लिया है।

दिग्विजय ने कहा कि आज लोकतंत्र खतरे में है और उसका कारण यह है कि देश में आजादी और बंटवारे के बाद जो सौहार्दपूर्ण वातावरण पैदा किया गया था वह धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। कट्टरपंथी ताकतें धार्मिक उन्माद फैलाकर एक तरफ हिंदुओं को और दूसरी तरफ मुसलमानों को भड़का रही हैं। जो सौहार्दपूर्ण वातावरण बना हुआ था, उसमें अब हम लोगों को संकट नजर आ रहा है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक सौहार्दपूर्ण वातावरण में भेदभाव और आर्थिक असमानता पर केंद्र सरकार को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सदन में कहा कि मजदूरों की हालत ठीक नहीं है। आज देश में अव्यवस्था की स्थिति है। उन्होंने किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने शिक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश भर में एक लाख शासकीय स्कूल बंद किए जा चुके हैं।
 

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