क्रिसिल रिपोर्ट: बजट 2026-27 अब 'तात्कालिक राहत' नहीं, 'दूरगामी विकास' पर केंद्रित, अर्थव्यवस्था को मिलेगी लंबी उड़ान

बजट 2026-27 में 'तात्कालिक राहत' से हटकर 'लंबी अवधि की सोच' पर जोर: रिपोर्ट


नई दिल्ली, 2 फरवरी। केंद्रीय बजट 2026–27 में सरकार ने 'लंबी अवधि की सोच' को प्राथमिकता दी है। इसके लिए पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) बढ़ाया गया है और खर्च के तरीके में सुधार किया गया है।

सोमवार को जारी क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट का रुझान अब लंबे समय की योजनाओं की ओर बढ़ रहा है। इसमें सुधारों, कारोबार करने में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) और सबको साथ लेकर चलने वाली ग्रोथ को खास जगह दी गई है।

रिपोर्ट में याद दिलाया गया कि कोविड-19 महामारी के तुरंत बाद सरकार का मुख्य ध्यान इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने और महामारी के कारण अर्थव्यवस्था व लोगों की भलाई पर पड़े असर को कम करने पर था।

लेकिन जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत और स्थिर हुई, वैसे-वैसे विकास के लिए सीधे और अल्पकालिक समर्थन की जरूरत कम होती गई। इसी वजह से बजट का फोकस अब लंबे समय की ग्रोथ पर आ गया है।

सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को और मजबूत करने पर ध्यान दिया है, ताकि भविष्य में विकास के अगले चरण के लिए मंच तैयार हो सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राजकोषीय समेकन यानी फिस्कल घाटा कम करने की दिशा में हुई प्रगति और मध्यम अवधि के कर्ज लक्ष्य की ओर बढ़ने से सरकार को अल्पकालिक सोच से आगे देखने की गुंजाइश मिली है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो पिछले वित्त वर्ष के 6.5 प्रतिशत से ज्यादा है। इसकी वजह उपभोग को समर्थन देने वाली नीतियां और टैक्स में राहत है, जिससे लोगों का खर्च बढ़ा।

बजट में उपभोग संबंधी नीतियां जारी रखी गई हैं, हालांकि कम आय वाले परिवारों के लिए केंद्रीय कल्याण योजनाएं चलती रहेंगी, जिनमें रोजगार और संपत्ति बनाने वाली योजनाओं पर ज्यादा जोर दिया गया है, भले ही सब्सिडी में कमी की गई हो।

रिपोर्ट में बताया गया है कि खर्च की गुणवत्ता बेहतर हुई है। केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च जीडीपी का 3.1 प्रतिशत बना हुआ है, जबकि राज्यों को दी गई मदद जोड़ने पर कुल प्रभावी पूंजीगत खर्च जीडीपी का लगभग 4.4 प्रतिशत हो जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले कुछ वर्षों में राजस्व व्यय को पूंजीगत खर्च की ओर मोड़ा गया है। लेकिन ब्याज भुगतान बढ़ने के कारण आगे राजस्व खर्च में बड़ी कटौती करना मुश्किल हो सकता है।

पूंजीगत व्यय में 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर 12.2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो हाल के वर्षों के सबसे बड़े बजट प्रावधानों में से एक है और जीडीपी का करीब 4.4 प्रतिशत है।

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रखा है, जबकि वित्त वर्ष 2026 के लिए यह 4.4 प्रतिशत आंका गया था। वहीं, नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ 10 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
 

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