राज्यसभा में गरजे सांसद: डिजिटल युद्ध को तैयार रहे भारत, सामरिक साइबर सुरक्षा को मिले सर्वोच्च प्राथमिकता

राज्यसभा : सामरिक साइबर सुरक्षा नीति को प्राथमिकता दी जाए, डिजिटल युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए


नई दिल्ली, 2 फरवरी। राज्यसभा में सोमवार को देश के क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा व इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जैसे महत्वपूर्ण विषय पर बात की गई। गुजरात से भाजपा के राज्यसभा सांसद बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने नेशनल क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर डिफेंस सेंटर की स्थापना की बात कही।

उन्होंने सदन में कहा कि इसके लिए तकनीकी रक्षा तंत्र को मजबूत किया जाए और सैन्य व नागरिक प्रणालियों के बीच समन्वय बेहतर किया जाए। सदन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत को न केवल साइबर खतरों से सतर्क रहना है बल्कि भविष्य के डिजिटल युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सॉफ्टवेयर आधारित हमलों के प्रति भी तैयार रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दुनिया में उभरते साइबर और इंफॉर्मेशन वॉरफेयर के खतरों और हाल में ही वेनेजुएला में बड़ी विवादित घटनाओं के पीछे साइबर हमला और पावर ग्रिड को निशाना बनाए जाने जैसे दावों ने वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। जहां कुछ व्यक्तियों और वीडियो में यह दावा किया गया है कि पावर ग्रिड, जीपीएस व रडार सिस्टम पर साइबर हमले के लिए ब्लैक आउट किया गया था, वहीं सरकारी रिपोर्ट बताती है कि पावर ग्रिड की बुनियादी कमजोरियां, रखरखाव की कमियां व तकनीकी विफलता भी बड़ी वजह रही है।

बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने कहा कि वास्तविक कारणों का अध्ययन करना जरूरी है न कि सिर्फ संदेह और अटकलों पर आधारित निष्कर्ष लेना। उन्होंने कहा कि भारत जैसे तेजी से डिजिटाइज्ड हो रहे देश के लिए यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कि टेलीकॉम, पावर ग्रिड, रडार, जीपीएस व सरकारी नेटवर्क पर हमला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

उन्होंने राज्यसभा में कहा कि साइबर हमलों और उनकी प्रभावशीलता को समझना और उनका डिफेंस तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। हमें एक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति, आपातकालीन बुनियादी ढांचा, प्रोटोकॉल और राष्ट्रीय संकट प्रबंधन रणनीति को और अधिक मजबूत बनाना चाहिए। इससे पहले कि हम दावों या अफवाहों से प्रभावित हों, हमें वैज्ञानिक तथ्यों, तकनीकी विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के आधार पर अपनी तैयारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि वे सरकार से अनुरोध करते हैं कि रणनीतिक सामरिक साइबर सुरक्षा नीति को प्राथमिकता दी जाए। नेशनल क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर डिफेंस सेंटर की स्थापना और मजबूत संशोधन उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने इसके लिए सार्वजनिक-निजी पार्टनरशिप का सुझाव दिया।

उन्होंने सदन में बोलते हुए कहा कि इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत तकनीकी रक्षा तंत्र को मजबूत किया जाए। हमारे सैन्य व नागरिक प्रणालियों के बीच समन्वय और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। भारत को न केवल आज के साइबर खतरों से सतर्क रहना है बल्कि भविष्य के डिजिटल युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सॉफ्टवेयर-आधारित हमलों के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
 
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