भीलवाड़ा, 2 फरवरी। राजस्थान के नगर निगम सभागार में आयोजित संगीतमय प्रार्थना सभा में महात्मा गांधी के आदर्शों और उनकी विचारधारा की गूंज सुनाई दी। इस आयोजन का उद्देश्य गांधीजी के जीवन, सत्य, अहिंसा और सकारात्मक चिंतन को समाज में फैलाना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गांधीजी के आदर्शों को अपनाकर ही हम एक सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रार्थना और संगीत मानव मन को शांति, सहनशीलता और करुणा से भरते हैं, जो समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत शारदा सोलंकी द्वारा रामधुन से हुई, जिसके बाद मीना, दिव्या और चारुल भट्ट ने “तेरी पनाह में हमें रखना” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। हेमांग सोलंकी ने "हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के" गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को झकझोर दिया। गौरीशंकर ने "इंसान का इंसान से हो भाईचारा" गीत गाकर सभागार को झूमने पर मजबूर कर दिया।
इस बीच, तिलोक छाबड़ा ने अपनी रचना "आजादी का मतलब बंदे जान सके तो जान" प्रस्तुत की, जो सभी को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती रही। "सुन ले बापू यह पैगाम" गीत ने सभा में एक आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।
कार्यक्रम के अंत में "अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो" की सामूहिक प्रार्थना ने सबको एक नई दिशा दी। इस आयोजन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसमें विधायक अशोक कोठारी, पूर्व न्यास अध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी और अन्य गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया।
रसधारा संस्थान के अध्यक्ष तिलोक छाबड़ा ने कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों और कलाकारों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का आयोजन रसधारा संस्थान द्वारा किया गया था और इसमें शहर के सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के बाद जो पहला रविवार आता है, उस पर हम लोग ये कार्यक्रम का आयोजन करते हैं। 32 सालों से इसका आयोजन किया जा रहा है। इसमें सभी लोग मिलजुलकर इस कार्यक्रम को करते हैं। इस कार्यक्रम का मकसद होता है कि देश के लोगों को गांधी के आदर्शों पर चलना चाहिए और देश के प्रति जज्बा बढ़ना चाहिए।