पूर्व मंत्री हेम सिंह भड़ाना का अलवर में निधन, भाजपा के दिग्गज नेता के निधन से छाया शोक

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हेमसिंह भड़ाना का निधन, अलवर में ली अंतिम सांस


अलवर, 2 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, दो बार विधायक और वसुंधरा राजे सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे हेम सिंह भड़ाना का सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे अलवर में उनके निवास पर 60 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से अलवर और खैरथल-तिजारा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

वे लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे और कुछ दिन पहले उन्हें ब्रेन हेमरेज भी हुआ था, जिसके बाद वे काफी समय तक गुड़गांव के अस्पताल में भर्ती रहे।

सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। परिजन उन्हें गंभीर हालत में अलवर के टेल्को चौराहे स्थित हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। हॉस्पिटल के संचालक डॉ. हरीश गुप्ता ने बताया कि जब उन्हें इमरजेंसी में लाया गया, तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी।

हेम सिंह भड़ाना अपने पीछे पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। वे अलवर शहर के वीर सावरकर नगर, खाटू श्याम मंदिर के पास रहते थे। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव भगेरी कला (किशनगढ़ बास विधानसभा क्षेत्र) में किया जाएगा, जो वर्तमान में खैरथल-तिजारा जिले में आता है। उनके निधन के चलते अलवर और खैरथल में आज भाजपा के सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए हैं।

हेम सिंह भड़ाना का जन्म 7 फरवरी 1966 को हुआ था। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की थी। वे शुरू से ही छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। वर्ष 1991 से 1992 तक वे राजकीय कला एवं विधि महाविद्यालय, अलवर के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। इसके बाद राजनीतिक सफर आगे बढ़ता गया और 10 फरवरी 2005 को वे पंचायत समिति किशनगढ़ बास के प्रधान बने।

विधानसभा राजनीति में उन्होंने थानागाजी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे वर्ष 2008 से 2013 तक 13वीं विधानसभा और 2013 से 2018 तक 14वीं विधानसभा के सदस्य रहे। अपने कार्यकाल के दौरान वे अपनी मुखर कार्यशैली और साफ-सपाट बोलने के अंदाज के लिए जाने जाते थे।

मंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल खासा सक्रिय रहा। 28 अक्टूबर 2014 को उन्हें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री बनाया गया। इसके बाद उन्हें उपभोक्ता मामलों का भी प्रभार सौंपा गया। वर्ष 2016 में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल में उन्हें मुद्रण एवं लेखन सामग्री, स्टेट मोटर गैराज और संपदा विभाग का मंत्री बनाया गया। साथ ही उनके पास सामान्य प्रशासन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहा।
 

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