बेंगलुरु, 1 फरवरी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने रविवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत 2026-27 के केंद्रीय बजट की आलोचना करते हुए इसे नगर निगम के बजट के समान बताया और इसे अपने राजनीतिक करियर का सबसे निराशाजनक बजट करार दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2025-26 के बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए 5.41 लाख करोड़ रुपए आवंटित करने का वादा किया था।
उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, मौजूदा बजट में यह आवंटन घटाकर 4.2 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है।
सिद्धारमैया ने कहा कि यह मेरे राजनीतिक करियर का सबसे निराशाजनक बजट है। यह किसी नगर निगम के बजट से बेहतर नहीं है। कर्नाटक को कुछ नहीं मिला। हमेशा की तरह कर्नाटक के साथ धोखा हुआ है। इस बजट से पूरे दक्षिण भारत को कुछ नहीं मिला है।
बेंगलुरु के लिए दो हाई-स्पीड रेलवे परियोजनाओं, हैदराबाद-बेंगलुरु और चेन्नई-बेंगलुरु की घोषणा का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं कर्नाटक के लिए बहुत कम फायदेमंद होंगी क्योंकि ये राज्य के भीतर लंबी दूरी तय नहीं करती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अगर केंद्र सरकार वास्तव में कर्नाटक की मदद करना चाहती थी, तो उसे बेंगलुरु-मुंबई और बेंगलुरु-मंगलुरु हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं की घोषणा करनी चाहिए थी।
सिद्धारमैया ने यह भी आरोप लगाया कि वित्त मंत्री सीतारमण ने बजट पेश करते समय उन्हीं घिसे-पिटे वाक्यांशों का इस्तेमाल किया और कहा कि बजट देश के विकास के लिए सही दिशा खोजने में केंद्र सरकार की अक्षमता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि इस बजट से साफ है कि केंद्र सरकार थक चुकी है और देश चलाने में असमर्थ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार थकी हुई दिखती है। अपने 13वें बजट में सरकार ने यह महसूस किया है कि महात्मा गांधी और कांग्रेस पार्टी के उद्देश्य सही थे। पहली बार केंद्र सरकार ने बौद्ध धर्म से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को याद किया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि रुपए के अवमूल्यन या इसे सुधारने के उपायों पर कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेश घट रहा है, आयात बढ़ रहा है, और निर्यात गिर रहा है, लेकिन बजट में इन चिंताओं का समाधान नहीं किया गया है।