बजट में मिडिल क्लास की आय बढ़ाने की बात नहीं है : शकील अहमद खान

बजट में मिडिल क्लास की आय बढ़ाने की बात नहीं है: शकील अहमद खान


पटना, 1 फरवरी। बिहार से कांग्रेस नेता शकील अहमद खान ने केंद्रीय बजट पर गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस बजट में मिडिल और लोअर क्लास के लोगों की आय बढ़ाने की कोई ठोस बात नहीं दिखती है।

शकील अहमद खान ने पटना में आईएएनएस से बातचीत में कहा कि अगर इस बजट को ध्यान से पढ़ा जाए तो इसमें चर्चा के लायक बहुत कम और चिंता के लायक बहुत अधिक बातें हैं। जो योजनाएं पहले से चल रही थीं, उन्हीं को नए नाम या नए दावों के साथ दोहराया गया है। उदाहरण के तौर पर बिहार सरकार जल-जीवन और पर्यावरण से जुड़ी योजनाओं को लेकर पीठ थपथपा रही थी, लेकिन पहले ही पूरा पैसा खर्च नहीं हो पाया। बजट आवंटन और वास्तविक खर्च में बहुत बड़ा अंतर है।

शकील अहमद खान ने कहा कि इस बजट में स्टूडेंट्स, युवाओं, मजदूरों और गरीब वर्ग के लिए कोई ठोस बजटरी प्रावधान नजर नहीं आता है। मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास की आय कैसे बढ़ेगी, इसका कोई रोडमैप नहीं है। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है, लेकिन करेंसी स्टेबिलिटी या एक्सपोर्ट बढ़ाने का कोई स्पष्ट विजन इस बजट में दिखाई नहीं देता। बिहार की बात करें तो कुछ ट्रेनों की घोषणा कर दी गई है, ताकि लोग बाहर जाकर रोजगार ढूंढ सकें। लेकिन बिहार में औद्योगिक विकास और आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास-खासकर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों में कटौती साफ दिखती है। स्पेशल पैकेज या अतिरिक्त केंद्रीय सहायता की बात पहले हुई थी, लेकिन बिहार को ठोस रूप से कुछ नहीं मिला। डबल इंजन की सरकार जिस तरह से बिहार में जीत कर आई, बजट से उम्मीदें पूरी नहीं हो पाई हैं। बिहार और देश की जनता-खासकर मिडिल क्लास को इस बजट में कुछ खास नहीं मिला है।

शकील अहमद खान ने कहा कि राहुल गांधी ने बिल्कुल सही कहा है। आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगार युवा हैं, लेकिन उनके लिए जॉब क्रिएशन का कोई स्पष्ट रोडमैप इस बजट में नहीं है। ऊपर से महंगाई बढ़ रही है, गैस सिलेंडर के दाम बढ़े हैं, एक्सपोर्ट दबाव में है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर कमजोर हो रहा है। सवाल यह है कि यह बजट आम जनता को सशक्त कर रहा है या धीरे-धीरे और कमजोर बना रहा है। मेरी नजर में यह बजट देश की वास्तविक समस्याओं को संबोधित करने में असफल रहा है।
 
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