सीएम सरमा का कड़ा संदेश: असमिया पहचान खतरे में, ऐतिहासिक इलाकों में घट रहे मूल निवासी; जनता लड़ेगी रक्षा की लड़ाई

असमिया पहचान की रक्षा की लड़ाई जनता को ही लड़नी होगी: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा


गुवाहाटी, 1 फरवरी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को असमिया समाज के सामने खड़े होते पहचान संकट को रेखांकित करते हुए कहा कि अब असमिया पहचान की रक्षा की लड़ाई का नेतृत्व जनता को स्वयं करना होगा। उन्होंने चिंता जताई कि महावीर चिलाराय और महाराज नरनारायण के शासन वाले ऐतिहासिक क्षेत्रों में असमिया लोग अल्पसंख्यक बनते जा रहे हैं।

दर्रांग जिले के पिपोरा दुकान में आयोजित 516वें बिस्वा महावीर चिलाराय दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने चिलाराय–नरनारायण क्षेत्र के बड़े हिस्सों में आक्रामक अतिक्रमण और जनसांख्यिकीय बदलावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि असम के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास के केंद्र रहे इलाकों में स्वदेशी समुदाय की उपस्थिति लगातार कमजोर हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “असमिया समाज आज पहचान के संकट का सामना कर रहा है। जिन क्षेत्रों पर कभी चिलाराय और नरनारायण का शासन था, वहां आज असमिया लोग अल्पसंख्यक बनते जा रहे हैं।” उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी विरासत और पहचान की रक्षा के लिए केवल सरकार पर निर्भर न रहें।

सरमा ने कहा कि राज्य सरकार पिछले पांच वर्षों से खोई हुई पहचान को वापस पाने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन यह लड़ाई केवल प्रशासनिक कदमों से नहीं जीती जा सकती।

उन्होंने कहा, “सरकार पहल कर सकती है, लेकिन इस आंदोलन का नेतृत्व जनता को ही करना होगा।” उन्होंने गरुखुटी भूमि पुनःप्राप्ति अभियान को एक लंबी लड़ाई की सिर्फ शुरुआत बताया।

कोच राजबोंगशी समुदाय की स्थिति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अविभाजित गोलपाड़ा जिले में यह समुदाय अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि पूर्व कोच साम्राज्य के विशाल क्षेत्रों पर बांग्लादेश से आए प्रवासियों द्वारा अतिक्रमण किया जा चुका है।

महावीर चिलाराय को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सरमा ने उन्हें न केवल एक निर्भीक सेनानायक बल्कि असम के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक पुनर्जागरण की नींव रखने वाला दूरदर्शी वास्तुकार बताया।

उन्होंने कहा कि महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के चिलाराय के संरक्षण से एक सांस्कृतिक जागरण का सूत्रपात हुआ और ‘वृंदावनी वस्त्र’ जैसी अद्वितीय कृति उसी युग की स्थायी पहचान है।

मुख्यमंत्री ने महावीर चिलाराय और लचित बरफूकन को प्रेरणा के शाश्वत स्रोत बताते हुए कहा कि उनके साहस और बलिदान से ही असमिया समाज को आज की चुनौतियों से पार पाकर अपनी सभ्यतागत विरासत की रक्षा करनी चाहिए।
 
Similar content Most view View more

Latest Replies

Forum statistics

Threads
16,711
Messages
16,748
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top