विपक्ष ने केंद्रीय बजट को बताया 'जनविरोधी, निराशाजनक और पूंजीपतियों का खेल', अखिलेश बोले- 'शेयर मार्केट धड़ाम'

केंद्रीय बजट पर विपक्ष का निशाना, ‘निराशाजनक और निंदनीय’ करार


लखनऊ, 01 फरवरी। केंद्रीय बजट को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस ने बजट को आम जनता से कटा हुआ, पूंजीपतियों के पक्ष में और गरीब-मध्यम वर्ग की उम्मीदों को तोड़ने वाला करार दिया है।

विपक्षी नेताओं ने शेयर बाजार से लेकर महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक सुरक्षा और किसानों तक हर मोर्चे पर बजट को विफल बताया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजट पेश होते ही तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्‍होंने कहा, "आ गया भाजपाई बजट का परिणाम, शेयर मार्केट हुआ धड़ाम।"

उन्होंने कहा कि हमने पहले ही कहा था कि सवाल ये नहीं है कि शेयर बाजार रविवार को खुलेगा, सवाल ये है कि और कितना गिरेगा। जब भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं है, तो उसके बजट से क्या होगा? हम तो भाजपा के हर बजट को 1/20 (एक बंटे बीस) का बजट मानते हैं क्योंकि वो पांच प्रतिशत लोगों के लिए होता है। भाजपा का बजट, अपने कमीशन और अपने लोगों को सेट करने का बजट होता है। भाजपा का बजट, भाजपाई भ्रष्टाचार की अदृश्य खाता-बही होता है।

अखिलेश यादव ने बजट 2026 को लेकर कहा कि इस बजट में न आम जनता का जिक्र है न फ़िक्र। महंगाई बेतहाशा बढ़ने पर भी इस बजट में जनता को टैक्स में छूट न देना, ‘टैक्स-शोषण’ है।

⁠उन्होंने आगे कहा कि अमीरों के काम-कारोबार और घूमने-फिरने पर छूटें दी गईं हैं, लेकिन बेरोजगारी से जूझ रहे लोगों की उम्मीदों की थाली खाली है। मध्यम वर्ग अपने को ठगा महसूस कर रहा है। ⁠शोषित, वंचित, ग़रीब व्यक्ति जहां था, उससे भी नीचे जाता दिख रहा है। इस बजट ने उसकी चादर में पैबंद लगाने की जगह, उसे और चिथड़ा कर दिया है क्योंकि सामाजिक सुरक्षा शाब्दिक औपचारिकता तक सीमित होकर रह गई है।

उन्‍होंने कहा कि ⁠किसान, मजदूर, श्रमिक, कारोबारी, और छोटे दुकानदार अपने लिए मिली राहत को दूरबीन लेकर भी ढूंढ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने बजट को “निराशाजनक” और “निंदनीय” बताया है।

वहीं, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संसद में पेश बजट को लेकर सरकार की नीयत और नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “देश के संसद में आज केंद्र सरकार द्वारा पेश बजट में विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं, वादों और आश्वासनों के संबंध में भविष्य में इनके परिणामों को लेकर यही लगता है कि इनके नाम तो बड़े-बड़े हैं, किंतु जमीनी स्तर पर इनके दर्शन छोटे ना हों तो बेहतर होगा।”

मायावती ने कहा, “इसीलिए सर्वसमाज के हित में केवल बातें ना हों बल्कि इनपर सही नीयत से अमल भी जरूरी है।”

उन्होंने आगे कहा कि वैसे तो केंद्र सरकार का बजट सत्ताधारी पार्टी की नीति व नीयत में चाल, चरित्र और चेहरे का आईना होता है, जिसमें यह झलक मिलती है कि सरकार की सोच वास्तव में गरीब व बहुजन-हितैषी होकर व्यापक देशहित की है या फिर पूंजीवादी सोच की पोषक और बड़े-बड़े पूंजीपति समर्थक है।

मायावती ने कहा कि खासकर अपने भारत देश के संदर्भ में इस बात का भी विशेष महत्व है कि सरकार की नीति दीर्घकाल में आत्मनिर्भरता की है, तो उसके लिए सरकारी क्षेत्र को कितना महत्व देकर परम पूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कल्याणकारी संविधान की पवित्र मंशा के हिसाब से क्या कार्य किया गया है।

उन्होंने बजट पर सवाल उठाते हुए कहा, संसद में आज पेश बजट को भी देखा जाना चाहिए कि कहीं यह बजट भी आया और गया की तरह परंपरागत रूप से मायूस करने वाला तो नहीं है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी बजट पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह पूरी तरह दिशाहीन और आम जनता की उम्मीदों को तोड़ने वाला बजट है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार जैसे बुनियादी विषयों पर सरकार ने जनता को पूरी तरह निराश किया है। अजय राय ने आरोप लगाया कि मध्यम वर्ग और गरीबों को राहत देने के बजाय यह बजट सिर्फ चंद पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने वाला 'पूंजीवादी बजट' है। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं से कटी हुई भाजपा सरकार का यह असली चेहरा है।
 

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