नई दिल्ली, 1 फरवरी। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने केंद्रीय बजट की सराहना करते हुए कहा है कि एमएसएमई के माध्यम से भारत की आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए इस बजट में काफी प्रयास किया गया है, जो सराहनीय है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, "मैं समझता हूं कि एमएसएमई के लिए ही ये बजट है, इसलिए क्योंकि ये एमएसएमई भारतीय आर्थिक व्यवस्था का ऋण है और खेती के बाद सबसे ज्यादा चाहे जीडीपी का मामला हो, चाहे उत्पादन का मामला हो, चाहे निर्यात का मामला हो, सब में हमारा एमएसएमई आगे है। इसी को दृष्टिकोण करते हुए इस बजट में जो हमारा 2025-26 में बजट 23,168 करोड़ का था, उसको इस बार 24,566 करोड़ रुपए का बना दिया गया है। इसलिए आप इस बजट का महत्व समझ सकते हैं, क्या एमएसएमई के लिए रहा।"
उन्होंने कहा कि ग्रोथ फंड स्थापित करके छोटे-छोटे उद्यमियों की मदद के लिए 10 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। यह बताता है कि एमएसएमई के लिए भारत सरकार का यह बजट बहुत अच्छा है।
मांझी ने कहा, "बजट इस दृष्टिकोण से है कि 2030 में हम संसार की तीसरी अर्थव्यवस्था बनना चाहते हैं और 2047 में संसार का अग्रिम विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में हैं। उसमें एमएसएमई का योगदान बहुत है।"
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि अमेरिका के टैरिफ से बचने का भी एक तरीका है कि हम स्वदेशी और स्वराज की बात करें। इसलिए बजट में महात्मा गांधी ग्राम स्वराज मिशन की घोषणा की गई है। इसके माध्यम से हम खादी ग्राम उद्योग को बढ़ावा देंगे, आत्मनिर्भर बनेंगे और लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
उन्होंने कहा कि एमएसएमई के माध्यम से भारत की आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए इस बजट में काफी प्रयास किया गया है, जो कि सराहनीय है।
विपक्ष को जवाब देते हुए जीतन राम मांझी ने कहा कि अगर दिन में विपक्ष को सूरज दिखाई नहीं देता है तो क्या इसमें सूरज का दोष है या उनकी आंख का दोष है? इसी तरह विकसित भारत के लिए बजट में बहुत सारी बातें हैं, तो फिर ये खोखला बजट कैसे हो सकता है?