नई दिल्ली, 1 फरवरी। भारत में लोगों की थाली में चावल का होना आम बात है, क्योंकि यह सालों से यहां के लोगों की डाइट का अहम हिस्सा है। कई राज्यों में लोग दिन की शुरुआत और समापन दोनों समय चावल या चावल से बनी चीजें खाना पसंद करते हैं। आमतौर पर लोग सफेद चावल (व्हाइट राइस) या भूरे चावल (ब्राउन राइस) खाते हैं, लेकिन कुछ लोग इस चीज को लेकर असमंजस में रहते हैं कि उनकी सेहत के लिए कौन सा चावल बेहतर रहेगा।
असल में, सफेद चावल (व्हाइट राइस) और भूरे चावल (ब्राउन राइस) में फर्क प्रोसेसिंग का है। ब्राउन राइस अनपॉलिश्ड चावल होते हैं, यानी इनके ऊपर की परतें हटाई नहीं जाती। इसके कारण इनमें ज्यादा पोषक तत्व मौजूद रहते हैं। वहीं, व्हाइट राइस पॉलिश्ड होता है और इसकी बाहरी परतें हटा दी जाती हैं। इससे यह सफेद और नरम बन जाता है, लेकिन पोषण की बड़ी मात्रा खत्म हो जाती है।
ब्राउन राइस में फाइबर, मैग्नीशियम, फास्फोरस और विटामिन बी भरपूर मात्रा में होते हैं। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और वजन घटाने में मदद करता है। साथ ही, ब्राउन राइस ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों के लिए यह एक बेहतर ऑप्शन बन सकता है। यह कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में भी मदद करता है। अगर आप शुगर कंट्रोल या वजन कम करना चाहते हैं, तो ब्राउन राइस को अपनी डाइट में शामिल करना बेहतर हो सकता है।
व्हाइट राइस जल्दी पच जाता है और हल्का स्वाद देता है, इसलिए जिन लोगों की पाचन क्षमता कमजोर है या जिन्हें जल्दी एनर्जी चाहिए, उनके लिए यह ठीक रहता है। लेकिन ध्यान रहे, यह ब्लड शुगर को जल्दी बढ़ा सकता है और पोषण की मात्रा ब्राउन राइस की तुलना में कम होती है।
हालांकि, हर चीज की तरह ब्राउन राइस भी सबके लिए सही नहीं है। इसमें फाइटेट्स होते हैं, जो कुछ मिनरल्स के अवशोषण को रोक सकते हैं। जिन लोगों को गैस, एसिडिटी या कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें इसकी फाइबर की मात्रा परेशान कर सकती है।