नोएडा, 1 फरवरी। केंद्रीय बजट 2026 में रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। इस बार बजट का फोकस केवल बड़े महानगरों तक सीमित न रहकर छोटे और मध्यम आकार के शहरों यानी टियर-2 और टियर-3 शहरों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बजट आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट के संतुलित और टिकाऊ विकास की नींव रख सकता है। बजट की अहम घोषणाओं में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट के जरिए संपत्तियों की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना शामिल है। इसके तहत पुरानी या कम उपयोग में आने वाली सरकारी और निजी संपत्तियों को मॉनेटाइज किया जा सकेगा। इससे प्राप्त पूंजी को नए प्रोजेक्ट्स में लगाया जाएगा, जिससे सेक्टर में नकदी प्रवाह बढ़ेगा।
साथ ही, पारदर्शिता और निवेशकों का भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है। इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी बजट 2026 को मजबूत माना जा रहा है। सरकार ने 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित करने की योजना का ऐलान किया है। इन परियोजनाओं से प्रमुख शहरों के साथ-साथ उनके आसपास के इलाकों में लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग, औद्योगिक पार्क और नई टाउनशिप विकसित होने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
बेहतर कनेक्टिविटी से छोटे शहर बड़े आर्थिक केंद्रों से जुड़ेंगे, जिससे वहां रेजिडेंशियल और कमर्शियल रियल एस्टेट की मांग में इजाफा हो सकता है। इसके अलावा, बजट में 12.2 लाख करोड़ के पूंजीगत खर्च का प्रावधान किया गया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास को गति देगा। सड़कों, मेट्रो, रेल और शहरी सुविधाओं में सुधार से नए इलाकों में आवासीय परियोजनाएं आकर्षक बनेंगी।
साथ ही, औद्योगिक क्षेत्रों में 20,000 करोड़ के कार्बन कैप्चर प्रोजेक्ट्स से रियल एस्टेट सेक्टर को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड जैसी पहलों से फंडिंग में भरोसा बढ़ेगा और लंबे समय वाले प्रोजेक्ट्स में जोखिम कम होगा। इससे प्रोजेक्ट्स की समय पर डिलीवरी, बेहतर गुणवत्ता और संगठित विकास को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर बजट 2026 न केवल निवेशकों का विश्वास मजबूत करता है, बल्कि छोटे और मध्यम शहरों में रियल एस्टेट को नई पहचान और नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।