केंद्रीय बजट 2026: भारत बनेगा AI और डिजिटल सुपरपावर, दीपक शिकारपुर ने बताया तकनीकी भविष्य का अहम मोड़

केंद्रीय बजट 2026 भारत को एआई और डिजिटल सुपरपावर बनाएगा: दीपक शिकारपुर


पुणे, 1 फरवरी। काइनेटिक कम्युनिकेशंस के डायरेक्टर दीपक शिकारपुर ने केंद्रीय बजट 2026 को भारत के तकनीकी भविष्य के लिए एक अहम मोड़ बताया। उन्होंने दावा किया कि यह बजट देश को आत्मनिर्भरता और डिजिटल नेतृत्व की दिशा में तेजी से आगे ले जाने वाला है।

दीपक शिकारपुर ने कहा कि वे पिछले 41 वर्षों से आईटी इंडस्ट्री में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने 1985 में आईटी इंडस्ट्री जॉइन की थी, तब आईटी का मतलब इनकम टैक्स हुआ करता था, लेकिन आज हम पूरी तरह से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डिजिटल वर्ल्ड के युग में प्रवेश कर चुके हैं, जहां हर तरफ डिजिटाइजेशन की चर्चा हो रही है। केंद्रीय बजट 2026 के शुरुआती पांच मिनटों में ही एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत की घोषणा। इसके साथ ही चार राज्यों में रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिज) की खोज पर फोकस किया जाएगा। इससे आने वाले समय में भारत में हार्डवेयर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

शिकारपुर ने कहा कि वर्तमान में भारत का लगभग 90 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट सेक्टर चीन और ताइवान पर निर्भर है। यदि यह मैन्युफैक्चरिंग भारत में ही होने लगे, तो आत्मनिर्भर भारत मिशन को जबरदस्त मजबूती मिलेगी। उन्होंने बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर किए गए प्रावधानों को भी बेहद अहम बताया। उनके अनुसार, एआई की मूल नींव डेटा साइंस पर टिकी है और यहीं पर डेटा सेंटर्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

दीपक शिकारपुर ने बताया कि यदि बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में डेटा सेंटर्स स्थापित करती हैं, तो उन्हें 20 साल की टैक्स हॉलीडे दी जाएगी, जो अपने आप में एक बड़ी राहत और आकर्षक पहल है। इसके अलावा डेटा सेंटर्स को ग्रीन बनाने के लिए 40 प्रतिशत तक की ग्रांट देने का भी प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर यह धारणा है कि डेटा सेंटर्स बहुत अधिक पानी और बिजली की खपत करते हैं, लेकिन यदि उन्हें हरित तकनीक की ओर प्रोत्साहित किया जाए, तो इससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी और यह पृथ्वी के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।

दीपक शिकारपुर ने छात्रों, शिक्षण संस्थानों और श्रोताओं से अपील करते हुए कहा कि भविष्य की नौकरियां डेटा सेंटर्स और जीसीसी में हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मई 2026 से पहले ही शिक्षण संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम में बदलाव करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी न केवल एआई में दक्ष हो, बल्कि डेटा सेंटर्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स में काम करने के लिए भी पूरी तरह तैयार हो। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भारत समय रहते कुशल वर्कफोर्स तैयार नहीं कर पाया, तो यह विकास की गति धीमी हो सकती है। लेकिन यदि बहुराष्ट्रीय कंपनियों को यह भरोसा हो गया कि भारत उनके डेटा सेंटर्स और जीसीसी को संचालित करने के लिए पूरी तरह तैयार है, तो देश में और भी अधिक निवेश आएगा।

शिकारपुर ने बताया कि पुणे में एक नई हाई-स्पीड रेल परियोजना की योजना बनाई जा रही है, जिससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स की जरूरतों को मजबूती मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि दुर्भाग्यवश अकादमिक सिस्टम तकनीकी बदलावों को समझने और अपनाने में थोड़ा धीमा रहता है, खासकर आईटी सेक्टर में। इसलिए आईटी संस्थानों और विश्वविद्यालयों को हर साल अपने सिलेबस की समीक्षा करनी चाहिए। केंद्रीय बजट 2026 से प्रेरणा लेते हुए डेटा सेंटर और जीसीसी से जुड़े विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करना समय की मांग है, ताकि भारत वर्क-रेडी मानव संसाधन तैयार कर सके और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की ओर मजबूती से आगे बढ़े।
 
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