सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मुफ्त सैनिटरी पैड के फैसले का राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने किया स्वागत

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मुफ्त सैनिटरी पैड के फैसले का राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने किया स्वागत


आगरा, 1 फरवरी। सर्वोच्च न्यायालय ने बीते शुक्रवार को सुविधाओं की कमी और मासिक धर्म में महिलाओं की स्वच्छता के संदर्भ में होने वाली परेशानी पर ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए इसे जीवन का अभिन्न अंग बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को आदेश देते हुए प्रत्येक स्कूल में बच्चियों को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन निशुल्क उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। अब उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। साथ ही अलग-अलग शौचालय बनाने की मांग भी की है।

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने स्कूलों में लड़कियों को मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कहा, "सबसे पहले, मैं सभी महिलाओं की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं, लेकिन मैं यह भी कहना चाहूंगी कि आप शायद इस बात से अवगत हों कि पिछले डेढ़ साल से मैं इसके लिए प्रयासरत हूं और मेरा विशेष ध्यान शौचालयों की संख्या बढ़ाने पर रहा है।"

उन्होंने आगे कहा, "शौचालयों की संख्या बढ़ाने के साथ ये भी जरूरी है कि दोनों शौचालयों को अलग-अलग बनाया जाए। देखा ये जा रहा है कि दोनों शौचालयों को एक साथ बना दिया जाता है। मैंने इसके लिए अलग-अलग जिलों में प्रस्ताव भी भेज दिया है। दूसरा, ये भी सुनिश्चित करते हैं कि शौचालयों में वेंडिंग मशीन है कि नहीं है। सरकार पहले भी मुफ्त सैनिटरी पैड का वितरण करती है, लेकिन ईंट-भट्टों पर काम करने वाली महिलाएं वंचित रह जाती हैं, क्योंकि वहां उनके कार्यस्थल तक ये सुविधा नहीं पहुंच पा रही है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद परिस्थितियों में बदलाव आएगा।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने कहा कि सैनिटरी पैड वितरण के साथ-साथ ये भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि दो अलग-अलग शौचालय हों। शौचालय में महिला कर्मचारी की ड्यूटी हो और वेंडिंग मशीन भी जरूर हो। अगर वेंडिंग मशीन शौचालय में नहीं है, तो सैनिटरी पैड का इंतजाम जरूर हो। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्कूलों में कार्यात्मक और स्वच्छ लिंग-विभाजित शौचालय बनाने का भी आदेश दिया है। कक्षा 6 से लेकर 12वीं तक मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
 

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