आम बजट से पहले राष्ट्रपति ने वित्त मंत्री को क्यों खिलाई दही-चीनी? जानिए इस खास परंपरा का धार्मिक-वैज्ञानिक महत्व

आम बजट से पहले राष्ट्रपति ने खिलाया वित्त मंत्री को दही-चीनी, जानें क्या कहता है धर्म और विज्ञान


नई दिल्ली, 1 फरवरी। आम बजट पेश करने से पहले रविवार को राष्ट्रपति भवन में एक खास परंपरा नजर आई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और मंत्रालय के अधिकारियों को दही-चीनी खिलाकर शुभकामनाएं दीं।

यह मुलाकात बजट प्रस्तुति से पहले की रस्म थी, जो सफलता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। भारत में दही-चीनी खिलाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। परीक्षा, इंटरव्यू, नौकरी या किसी महत्वपूर्ण काम से पहले यह खिलाना महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है।

घर की बुजुर्ग महिलाएं अक्सर कहती हैं, "बेटा, दही-चीनी खाकर जाओ, सब अच्छा होगा।" यह सिर्फ भावनात्मक समर्थन नहीं, बल्कि गहरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है।

दही-चीनी खिलाने का वैज्ञानिक महत्व भी है। दही प्रोबायोटिक्स से भरपूर होता है, जो अच्छे बैक्टीरिया प्रदान करता है। ये पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं, इम्युनिटी बढ़ाते हैं और तनावपूर्ण समय में पेट की समस्या से बचाते हैं। चीनी तुरंत ग्लूकोज का स्रोत बनती है, जो दिमाग और शरीर को तुरंत एनर्जी देती है। इससे एकाग्रता बढ़ती है, थकान कम होती है और दिनभर की चुनौतियों के लिए तैयार रहते हैं।

आयुर्वेद में दही को कूलिंग और सात्विक माना जाता है, जो शरीर को ठंडक देता है और मन को शांत रखता है। चीनी के साथ मिलकर यह संतुलन बनाता है, जो ठंडक और ऊर्जा का दोनों का मेल है। तनाव में सेरोटोनिन और डोपामाइन बढ़ाने में भी मदद करता है, जिससे मूड अच्छा रहता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

भारत में प्राचीन समय से चली आ रही दही-चीनी की परंपरा का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। दही को शुद्धता, शांति और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। मीठा सफलता, मधुरता और अच्छे परिणाम का संकेत देता है। दोनों मिलकर सात्विक भोजन बनते हैं, जो मन को स्पष्ट और शांत रखते हैं।

कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में दही चंद्रमा से जुड़ा है और चीनी गुरु से, जो गजकेसरी योग जैसा शुभ प्रभाव देता है। बुजुर्गों का यह आशीर्वाद पॉजिटिव थिंकिंग पैदा करता है, जो प्रदर्शन पर सीधा असर डालता है। यह परंपरा पूरे भारत में अलग-अलग रूपों में है। यह कहीं दही-चीनी, कहीं दही-गुड़ लेकिन भाव एक ही है, नई शुरुआत मीठी और सफल हो।
 

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