ए.के. हंगल जयंती: 52 की उम्र में स्वतंत्रता सेनानी बने एक्टर, जो कहलाए हिंदी सिनेमा की अमर आत्मा

ए.के. हंगल: 52 की उम्र में डेब्यू फिर रच दिया फिल्मी पर्दे पर न भूलने वाला सन्नाटा, बन गए सिनेमा की आत्मा


मुंबई, 1 फरवरी। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हैं जो भले ही अब इस दुनिया में न हों, मगर फिल्मों में अपनी शानदार अदायगी की वजह से दर्शकों-प्रशंसकों के जेहन में जिंदा है। उन्हीं यादगार अभिनेता में से एक रहे ए.के. हंगल या अवतार किशन हंगल, जिन्होंने अपनी उम्र और अनुभव को अपनी ताकत बनाया और उसे बड़े पर्दे पर बखूबी पेश किया।

शोले में रहीम चाचा का किरदार हो या लगान में शंभू काका, हर भूमिका में उन्होंने इतनी गहराई भरी कि दर्शक खुद को उनके साथ जोड़ लेते थे। उनका मशहूर डायलॉग “इतना सन्नाटा क्यों है भाई...” आज भी लोगों के जुबान पर है। आज एके. हंगल की जयंती है।

ए.के. हंगल का जन्म 1 फरवरी 1914 को सियालकोट (पाकिस्तान) में हुआ था। फिल्मों में आने से पहले वह स्वतंत्रता सेनानी थे। साल 1929 से 1947 तक उन्होंने भारत की आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। यही नहीं कराची जेल में वह तीन साल तक कैद रहे। जेल से रिहा होने के बाद वह भारत आए और मुंबई में बस गए।

उनकी बायोग्राफी ‘लाइफ एंड टाइम्स ऑफ ए.के. हंगल’ में उनसे जुड़े कई किस्से मिलते हैं। पुस्तक के अनुसार, फिल्मों में आने से पहले हंगल दर्जी का काम सीख चुके थे। पिता के एक दोस्त के सुझाव पर उन्होंने इंग्लैंड के एक दर्जी से यह हुनर सीखा। शुरुआती जीवन में दर्जी का काम करते हुए भी वह नाटक में भाग लेते थे। साल 1949 से 1965 तक उन्होंने भारतीय थिएटर में कई नाटकों में अभिनय किया।

ए.के. हंगल ने 52 साल की उम्र में फिल्मों में डेब्यू किया। साल 1966 में बसु भट्टाचार्य की फिल्म ‘तीसरी कसम’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में शुरुआत की। इसके बाद उनका सुनहरा दौर रहा। इस दौरान उन्होंने ‘नमक हराम’, ‘शौकीन’, ‘शोले’, ‘आइना’, ‘अवतार’, ‘अर्जुन’, ‘आंधी’, ‘तपस्या’ जैसी फिल्मों में शानदार काम किया।

उन्होंने राजेश खन्ना समेत लगभग सभी सुपरस्टार्स के साथ फिल्में कीं। ए.के. हंगल ने अपने करियर में मुख्य रूप से पिता, दादा, बड़े भाई या बुजुर्ग के किरदार निभाए। उनकी अदाकारी इतनी प्रभावशाली थी कि छोटी-छोटी भूमिकाओं में भी वे फिल्म को यादगार बना देते थे। उन्होंने कुल 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उनकी आखिरी फिल्म ‘पहेली’ थी, जो साल 2005 में आई थी।

इसके अलावा एके. हंगल टीवी सीरियल ‘मधुबाला’ में भी नजर आए। उम्र बढ़ने के बावजूद उनका जुनून कम नहीं हुआ। एक बार मुंबई में आयोजित फैशन शो में वे व्हीलचेयर पर रैंप वॉक कर दर्शकों का दिल जीत चुके थे। उनके योगदान को सम्मान देते हुए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने उन्हें साल 2006 में पद्म भूषण से नवाजा था।

ए.के. हंगल ने 26 अगस्त 2012 को 98 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।
 

Similar threads

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
2,529
Messages
2,561
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top