नेपाल में चुनाव नजदीक, नए संसद भवन निर्माण की समय-सीमा पर सरकार जूझ रही संवैधानिक चुनौती से

चुनाव नज़दीक, संसद भवन निर्माण को लेकर समय के खिलाफ जूझ रहा नेपाल


नई दिल्ली, 31 जनवरी। 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव और उसके पखवाड़े भर में नतीजे आने की संभावना के बीच नेपाल पर अपने नए संसद भवन का निर्माण समय पर पूरा करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण के लिए भवन तैयार करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, संविधान के तहत प्रतिनिधि सभा के चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर संसद सत्र बुलाना अनिवार्य है। ऐसे में समय पर भवन उपलब्ध कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।

बीते एक दशक से संसद एक किराए के भवन में संचालित हो रही थी। इसके बाद सरकार ने 2019 में स्थायी संसद भवन और उससे जुड़ी सुविधाओं के निर्माण की शुरुआत की। उसी वर्ष सितंबर में 12 इमारतों की आधारशिला रखी गई थी और इसे तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना का ठेका चीन की सेकेंड हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी और नेपाल की टुंडी कंस्ट्रक्शन के संयुक्त उपक्रम को दिया गया था। हालांकि, पिछले तीन वर्षों में पांचवीं बार समय-सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है।

इससे पहले, 1959 के पहले आम चुनाव से लेकर 2006 में संसद की बहाली तक काठमांडू के सिंह दरबार परिसर स्थित गैलरी बैठक में ही संसद संचालित होती रही। दूसरे जन आंदोलन के बाद बहाल हुई संसद, जिसमें पहली बार माओवादी प्रतिनिधि भी शामिल हुए, ने भी इसी भवन से कामकाज किया।

नेपाल का यह आंदोलन जन आंदोलन-II के नाम से जाना जाता है, जो तत्कालीन राजा ज्ञानेंद्र के प्रत्यक्ष शासन के खिलाफ हुआ था। इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों और माओवादी विद्रोहियों ने मिलकर संसद की बहाली और लोकतांत्रिक सुधारों की मांग की थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2008 में संविधान सभा के सदस्यों की संख्या बढ़ने के बाद गैलरी बैठक में जगह कम पड़ने लगी। इसके बाद काठमांडू के न्यू बानेश्वर स्थित बीरेंद्र अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र को चुना गया, जिसे सरकार ने किराए पर लिया था। हालांकि, आगजनी की एक घटना के बाद यह भवन उपयोग के लायक नहीं रहा और किराया समझौता भी नवीनीकृत नहीं किया गया।

लेख के अनुसार, सितंबर में हुए जेन-ज़ी आंदोलन के दौरान संसद भवन पहला निशाना बना और 9 सितंबर को इसे पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। इसके बावजूद, अधिकारियों का दावा है कि सिंह दरबार परिसर में निर्माणाधीन नई इमारतें समय पर तैयार हो जाएंगी।
 

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