दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने पाकिस्तानी आतंकी संगठन: रिपोर्ट

दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने पाकिस्तानी आतंकी संगठन: रिपोर्ट


वॉशिंगटन, 31 जनवरी। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी समाज, मीडिया और सरकारें अब भी “जिहादी आतंकवाद” को लेकर दूरदर्शिता की कमी दिखा रही हैं और पाकिस्तान समेत अन्य क्षेत्रों में इसकी गहराई, विचारधारा, प्रेरणाओं और बदलती रणनीतियों को समझने या प्रभावी ढंग से उससे निपटने में विफल रही हैं। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए पाकिस्तान अपने क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी संगठनों को समर्थन दे रहा है, जो क्षेत्रीय विस्तारवाद, जातीय सफाए और व्यापक क्षेत्रीय इस्लामीकरण में संलिप्त हैं।

अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘पीजे मीडिया’ के लिए लिखते हुए तुर्की की पत्रकार उज़ाय बुलुत ने कहा, “कई पश्चिमी लोग जिहादी आतंकवाद को केवल विदेश नीति से जुड़ी शिकायतों या अलग-थलग घटनाओं के नजरिए से देखते हैं, न कि एक वैचारिक और धार्मिक रूप से प्रेरित परिघटना के रूप में। इसके कारण आतंकवाद-रोधी रणनीतियां कमजोर पड़ जाती हैं और कहीं न कहीं पाकिस्तान जैसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को अप्रत्यक्ष समर्थन भी मिल सकता है। यह संकीर्ण दृष्टि तब तक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाती रहेगी, जब तक जिहादी आतंकवाद और उसके समर्थकों के प्रति पश्चिमी विदेश नीति में मूलभूत बदलाव नहीं होता।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान द्वारा समर्थित आतंकवादी संगठन दक्षिण एशिया में गंभीर सुरक्षा खतरा बने हुए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) एक पंजीकृत राजनीतिक दल है, जिसकी स्थापना 2023 में हुई और जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े नवीनतम राजनीतिक मोर्चे के रूप में देखा जाता है। लश्कर-ए-तैयबा को संयुक्त राष्ट्र की आईएसआईएस और अल-कायदा प्रतिबंध सूची (प्रस्ताव 1267) के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है।

बुलुत के अनुसार, लाहौर मुख्यालय वाला पीएमएमएल एक इस्लामवादी एजेंडा को बढ़ावा देता है। पार्टी ने 2024 के आम चुनावों में देशभर में 200 से अधिक उम्मीदवार उतारे, जिनमें लाहौर और कराची जैसे प्रमुख क्षेत्रों के उम्मीदवार भी शामिल थे, हालांकि पार्टी को कोई सीट नहीं मिली।

रिपोर्ट में कहा गया कि पीएमएमएल के प्रमुख नेताओं में ताल्हा सईद शामिल हैं, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी हाफिज मोहम्मद सईद (लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक) के पुत्र हैं, साथ ही लश्कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग भी नेतृत्व में शामिल हैं।

इसके अलावा, एक अन्य आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) की पाकिस्तान में लोकप्रियता बढ़ी है।

2019–2020 के दौरान उभरा टीआरएफ, लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रॉक्सी संगठन बताया गया है, जिसे जानबूझकर “स्थानीय और धर्मनिरपेक्ष प्रतिरोध” के रूप में पेश किया गया, ताकि उसके इस्लामवादी स्वरूप को छिपाया जा सके और वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के दबाव के बीच वैश्विक आतंकवाद निगरानी से बचा जा सके।
 

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