खेलो एमपी समापन: राज्यपाल पटेल का संदेश, खेल मैदान हार-जीत नहीं, गढ़ता है मजबूत चरित्र और जीवन मूल्य

खेल का मैदान चरित्र निर्माण की कार्यशाला: राज्यपाल मंगुभाई पटेल


भोपाल, 31 जनवरी। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि खेल का मैदान केवल हार-जीत का स्थान नहीं होता, वह चरित्र निर्माण की कार्यशाला भी होता है। राजधानी भोपाल में चल रहे खेलो एमपी यूथ गेम्स के राज्य स्तरीय समापन समारोह के पुरस्कार वितरण समारोह में कहा कि खेल हमें संकल्प सिखाता है।

उन्होंने कहा कि खेलों से हम प्रयास करना सीखते हैं। निरंतर अभ्यास हमें उत्कृष्टता का दृष्टिकोण प्रदान करता है। खेल ही हमें हार-जीत को स्वीकार करना सिखाते हैं, हमारे जीवन मूल्य विकसित करते हैं, और सर्वांगीण व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। खेल भावना हर व्यक्ति को परस्पर जोड़ती है। खेल ही हम सबमें राष्ट्र प्रेम और देशभक्ति का भाव जगाते हैं।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि खेल का मैदान केवल हार-जीत का स्थान नहीं होता, वह चरित्र निर्माण की कार्यशाला भी होता है। खेल हमें सिखाते हैं कि मैदान पर कोई जाति नहीं होती, कोई धर्म नहीं होता, कोई ऊंच-नीच नहीं होती। वहां केवल एक खिलाड़ी होता है और उसका तय लक्ष्य होता है।

उन्होंने कहा कि पहले मध्यप्रदेश को खेलों के मामले में शांत राज्य माना जाता था, लेकिन आज हमारा प्रदेश देश का स्पोर्ट्स पावर हाउस बनकर उभरा है। खेलो एमपी यूथ गेम्स के आयोजनों ने प्रतिभाओं को गांव की गलियों से खोजकर राष्ट्रीय मंच पर लाया है।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि यह अत्यंत गर्व की बात है कि मध्यप्रदेश की खेल अकादमियों से निकले खिलाड़ी आज केवल भोपाल या इंदौर का नाम नहीं, बल्कि पेरिस से लेकर लॉस एंजिल्स तक भारत का तिरंगा फहराने की क्षमता रखते हैं। हमारी शूटिंग रेंज हो, वाटर स्पोर्ट्स अकादमी हो या घुड़सवारी का मैदान, आज दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं प्रदेश के युवाओं के पास उपलब्ध हैं।

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि प्रदेश में खेलों के प्रोत्साहन के लिए सरकार की प्राथमिकता “खेल, खिलाड़ी और खेल का मैदान” है। प्रदेश सरकार इसी प्राथमिकता के आधार पर कार्य भी कर रही है।
 

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