तूफान दित्वाह से जूझ रहे श्रीलंका को भारत का बड़ा सहारा, 10 बेली ब्रिज भेजकर बहाल करेगा टूटी कनेक्टिविटी

भारत ने श्रीलंका को 10 और बेली ब्रिज भेजे, दित्वाह की तबाही के बाद सुधार और पुनर्निर्माण कार्य जारी


कोलंबो/विशाखापत्तनम, 31 जनवरी। श्रीलंका में दित्वाह तूफान ने तबाही मचाई। इससे उबरने और आम लोगों के जीवन को फिर से रास्ते पर लाने के लिए महीनेभर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। भारत एक अच्छे मित्र देश होने के नाते ऑपरेशन सागर बंधु के तहत पहले दिन से साथ खड़ा है।

ताजा अपडेट में भारत ने शनिवार को श्रीलंका के कुछ हिस्सों में जरूरी कनेक्टिविटी को फिर से ठीक करने में मदद के लिए कोलंबो में 10 बेली ब्रिज की एक खेप भेजी है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर जानकारी दी, "तूफान दित्वाह के बाद पुनर्निर्माण की कोशिशों में मदद के लिए भारत श्रीलंका के साथ खड़ा है। जरूरी कनेक्टिविटी को फिर से शुरू करने में मदद के लिए शनिवार को आईएनएस घड़ियाल पर विशाखापत्तनम से कोलंबो के लिए 10 बेली ब्रिज का एक कंसाइनमेंट भेजा गया।"

एमईए के मुताबिक, पुलों की सप्लाई भारत के 450 मिलियन डॉलर के स्पेशल आर्थिक पैकेज का हिस्सा है। इसकी घोषणा विदेश मंत्री एस जयशंकर के हाल के श्रीलंका दौरे के दौरान की गई थी। ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारत के इमरजेंसी एचएडीआर समर्थन के बाद किया गया था।

पिछले हफ्ते बी-492 कैंडी-रागला रोड पर 120 फुट के बेली ब्रिज का उद्घाटन श्रीलंका में भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर सत्यंजल पांडे और संसद सदस्य मंजुला सुरवीरा अराची ने मिलकर किया था। इस ब्रिज पर काम दित्वाह के बाद पुनर्निर्माण में भारत की मदद के तहत किया गया था।

इस पुल को फिर से बनाए जाने के बाद इलाके में जरूरी सड़क संपर्क को फिर से शुरू किया गया। इससे इलाके के समुदायों के लिए कनेक्टिविटी मजबूत हुई। इसने यात्रियों के आने-जाने, जरूरी सामान की सप्लाई और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को फिर से शुरू करने के लिए जरूरी महत्वपूर्ण ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को बनाया।

कोलंबो में भारतीय हाई कमीशन के मुताबिक, यह कैंडी-रागाला रोड पर दूसरा बेली ब्रिज है, जिसे भारत की तरफ से श्रीलंका को 450 मिलियन डॉलर की पुनर्निर्माण और सुधार में मदद के तहत बनाया गया है। यह 10 जनवरी को कैंडी-रागाला रोड (21 किमी) पर 100 फुट के बेली ब्रिज के लॉन्च के बाद आया है। बेली ब्रिज का उद्घाटन श्रीलंका में भारत के हाई कमिश्नर और ट्रांसपोर्ट और हाईवे के डिप्टी मिनिस्टर, प्रसन्ना गुणसेना, और एजुकेशन और हायर एजुकेशन की डिप्टी मिनिस्टर, मधुरा सेनेविरत्ना ने मिलकर किया था।
 

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