केंद्रीय बजट जन-जन तक पहुंचाने को तैयार बिहार भाजपा, गांव-गली में योजनाओं का होगा व्यापक प्रचार

केंद्रीय बजट की योजनाओं को घर-घर पहुंचाएगी बिहार भाजपा, मंडल से प्रमंडल तक बजट भाषण सुनने की रहेगी व्यवस्था


पटना, 31 जनवरी। बिहार भाजपा लोकसभा में पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026-2027 की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने को लेकर पूरी तैयारी में है। इसके लिए लोगों से संपर्क और इसकी प्रस्तावित योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए कई तरह की कार्ययोजना बनाई गई है।

भाजपा का मानना है कि जब तक योजनाओं की जानकारी गांव-गली तक नहीं पहुंचेगी, तब तक लोग उससे सीधे नहीं जुड़ेंगे। तब तक बजट का वास्तविक लाभ आमजन को नहीं मिल पाएगा। बजट की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए बिहार भाजपा द्वारा खास तैयारी की गई है। इसके लिए नेताओं को दायित्व सौंपे गए हैं और विस्तृत कार्य योजना तैयार की गई है। चार नेताओं को पूरे आयोजन की निगरानी का दायित्व दिया गया है। इसके लिए पूर्व विधायक प्रेम रंजन पटेल, विधायक मनोज शर्मा, प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल एवं प्रवक्ता प्रीति शेखर की एक टीम बनाई गई है।

बिहार प्रदेश के मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने शनिवार को बताया कि 1 फरवरी को संसद में वित्त मंत्री द्वारा पेश किए जा रहे बजट भाषण को सुनने और देखने के लिए मंडल तक व्यवस्था की जा रही है। इसमें दोनों उप मुख्यमंत्री, सम्राट चौधरी पटना में और विजय कुमार सिन्हा मुजफ्फरपुर में, गणमान्य और प्रबुद्ध लोगों के साथ बैठकर बजट भाषण को सुनेंगे।

उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य राजनीति नहीं बल्कि जनहित है। जनता को योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें उसका लाभ लेने के लिए प्रेरित करना है, ताकि सरकारी संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके। इसके लिए प्रदेश के नेताओं को जिम्मेदारी सौंपकर जिला प्रभारी का दायित्व दिया गया है।

उन्होंने बताया कि 2 फरवरी से 10 फरवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित होंगे जिसमें केंद्रीय सरकार के मंत्री, बिहार सरकार के मंत्री, क्षेत्रीय विधायक, सांसद, मेयर, और जिला परिषद प्रतिनिधि द्वारा सभी जिलों में प्रेस कांफ्रेंस एवं बजट पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। केंद्रीय बजट से संबंधित सभी कार्यक्रमों की जानकारी, प्रतिक्रियाएं एवं गतिविधियां सोशल मीडिया पर भी शेयर की जाएंगी।

उन्होंने बताया कि पार्टी का इस अभियान के पीछे उद्देश्य है कि बजट सिर्फ घोषणा-पत्र न रहे बल्कि विकास की बात सीधे गांव-गली एवं आम जनजीवन से जुड़े। इसके अतिरिक्त केंद्रीय मंत्रियों एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी अलग-अलग दायित्व दिया गया है। यह व्यवस्था न केवल बिहार में बल्कि पूरे देश में की जा रही है।
 

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