केंद्रीय बजट 2026: मिडिल क्लास-उद्योग को बड़ी राहत की आस, निवेश और रोजगार पर विशेषज्ञों का जोर

केंद्रीय बजट 2026 में मिडिल क्लास और उद्योग को बड़ी राहत की उम्मीद, निवेश और रोजगार बढ़ाने पर जोर : एक्सपर्ट्स


नई दिल्ली, 31 जनवरी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी को मोदी सरकार का 15वां बजट पेश करेंगी। यह एनडीए सरकार के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद दूसरा पूर्ण बजट होगा। इसके साथ ही निर्मला सीतारमण देश की ऐसी पहली महिला वित्त मंत्री बन जाएंगी, जो लगातार नौवीं बार बजट पेश करेंगी।

वहीं इस आम बजट 2026 को लेकर उद्योग और अर्थशास्त्रियों में सकारात्मक उम्मीदें बनी हुई हैं। आर्थिक सर्वेक्षण में भारत की विकास दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जिसे विशेषज्ञ यथार्थवादी मान रहे हैं। मिडिल क्लास को टैक्स राहत, उद्योगों के लिए निवेश प्रोत्साहन, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों पर फोकस के साथ आगामी बजट से अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

जेसीबीएल ग्रुप की निदेशक और चार्टर्ड अकाउंटेंट रेणु अरोरा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि हाल ही में जारी आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 2026 में भारत की आर्थिक विकास दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जो पूरी तरह यथार्थवादी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, यह विकास दर उसी का प्रतिबिंब है। मुद्रास्फीति में कुछ बढ़ोतरी संभव है, लेकिन यदि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत गति से बढ़ रही है, तो इसका असर सीमित रहेगा।

अरोरा ने आगे कहा कि आगामी बजट में मिडिल क्लास को राहत मिलने की पूरी संभावना है। खासतौर पर कैपिटल गेन टैक्स में राहत की उम्मीद जताई जा रही है। पिछली बार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की सीमा एक लाख रुपए तक बढ़ाई गई थी और इस बार भी इसमें सुधार हो सकता है। इसके अलावा अफॉर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए होम लोन के ब्याज पर अतिरिक्त राहत और शिक्षा बजट में बढ़ोतरी की संभावना है। उन्होंने कहा कि अगर लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा होगा, तो खपत बढ़ेगी और इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार ओल्ड टैक्स रिजीम के कुछ लाभों को न्यू टैक्स रिजीम में शामिल कर सकती है, ताकि टैक्सपेयर्स को अधिक फायदा मिले और वे अधिक खर्च कर सकें। इससे घरेलू मांग को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।

उद्योग के लिहाज से उन्होंने कहा कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी), स्किल और इनोवेटिव एजुकेशन पर सरकार का खास फोकस रह सकता है। पिछले बजट में घोषित आरएंडडी सेटअप को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी नए ऐलान संभव हैं। साथ ही, मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए डिफेंस सेक्टर में बड़े निवेश की संभावना है। इसके अलावा सड़कों, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स पर खर्च बढ़ाया जा सकता है, जिससे कनेक्टिविटी और कारोबार दोनों को फायदा मिलेगा।

रेणु अरोरा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हाउसिंग और अर्बन डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं आ सकती हैं। साथ ही, एविएशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और नए बिजनेस के नए अवसर खोलने के लिए भी बजट में घोषणाएं संभव हैं। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सेक्टर में भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए सरकार अतिरिक्त फंडिंग कर सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सोना, चांदी और अन्य कमोडिटीज को लेकर टैक्सेशन या रेगुलेशन से जुड़े बड़े ऐलान कर सकती है, जैसे पहले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड लाए गए थे। वहीं, कृषि क्षेत्र, जो भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, उसमें किसानों के लिए नई सब्सिडी या योजनाओं की भी उम्मीद जताई जा रही है।

वहीं, अर्थशास्त्री सूर्य नारायणन ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7 से 7.4 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारत पहले ही 6.7 से 7.2 प्रतिशत की विकास दर हासिल कर चुका है।

नारायणन के अनुसार, पीएलआई योजनाओं के जरिए इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि और सड़क विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश और बढ़ेगा। भारत पहले से ही इन सेक्टर्स में बड़े वैश्विक निवेश आकर्षित कर रहा है और सरकार इन उद्योगों के लिए अतिरिक्त फंडिंग की योजना बना रही है।
 

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