निवेशकों से फर्जीवाड़े का खेल खत्म! ईडी ने मेटलॉइड्स टेक्नोलॉजीज और निदेशकों पर कसा शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज

फर्जी निवेश योजनाओं का खुलासा: ईडी ने मेटलॉइड्स टेक्नोलॉजीज और उसके निदेशकों के खिलाफ की कार्रवाई


हैदराबाद, 31 जनवरी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने मेटलॉइड्स टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (एमटीपीएल), उसके प्रबंध निदेशक जयंत बिस्वास और उनकी पत्नी मौसुमी बिस्वास के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दायर की है। यह शिकायत विशेष पीएमएलए कोर्ट, रंगारेड्डी (हैदराबाद) में दाखिल की गई, जिस पर अदालत ने 28 जनवरी 2026 को संज्ञान ले लिया है।

ईडी ने यह जांच तेलंगाना पुलिस द्वारा दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इन एफआईआर में भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 420 के तहत एमटीपीएल, जयंत बिस्वास और अन्य पर भोले-भाले निवेशकों को उच्च ब्याज का लालच देकर ठगने का आरोप लगाया गया था। बाद में अन्य राज्यों के निवेशकों की शिकायतों के आधार पर भी कई एफआईआर दर्ज की गईं।

ईडी की जांच में यह सामने आया कि एमटीपीएल के पास रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की कोई अनुमति नहीं थी, जबकि वह निवेश योजनाएं चला रही थी। कंपनी की स्थापना मूल रूप से धातुकर्म उत्पादों और मेटल वेल्डिंग से जुड़े व्यापार के लिए की गई थी, लेकिन बाद में इसे शेल कंपनी के रूप में इस्तेमाल कर फर्जी और अत्यधिक रिटर्न वाली निवेश योजनाओं के नाम पर जनता से धन जुटाया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी के प्रमोटर जयंत बिस्वास और मौसुमी बिस्वास ने आकर्षक निवेश योजनाएं पेश कर 40 प्रतिशत से लेकर 200 प्रतिशत तक के अवास्तविक रिटर्न का वादा किया। ये योजनाएं पोंजी स्कीम के मॉडल पर आधारित थीं, जहां पुराने निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से जुटाए गए पैसों से किया जाता था।

ईडी ने पाया कि एमटीपीएल ने प्रत्येक निवेश आईडी पर 2,222 रुपये (और उसके गुणकों में) गैर-वापसी योग्य पंजीकरण शुल्क भी वसूला। कंपनी ने भ्रामक समझौते जारी किए, जिनमें अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा गया। किसी वास्तविक उत्पादक गतिविधि या वैध व्यवसाय के बिना ही, कंपनी ने 4,000 से अधिक निवेशकों से 114.52 करोड़ रुपये जुटाए। इसमें से 99.57 करोड़ रुपये ही निवेशकों को लौटाए गए, जबकि शेष 14.95 करोड़ रुपये की राशि धोखाधड़ी के जरिए अपने पास रखी गई।

निवेशकों में भरोसा पैदा करने के लिए कंपनी ने शानदार होटलों में सेमिनार, प्रिंटेड ब्रोशर, वीडियो प्रेज़ेंटेशन और मोटिवेशनल कार्यक्रमों का सहारा लिया। साथ ही, एजेंटों, टीम लीडरों और शुरुआती निवेशकों को कमीशन और प्रोत्साहन देकर और अधिक निवेश आकर्षित किया गया। हालांकि, जैसे ही नए निवेश कम हुए, भुगतान बंद हो गया और निवेशकों में घबराहट फैल गई।

ईडी के अनुसार, अपराध से अर्जित धन का इस्तेमाल प्रचार कार्यक्रमों, यात्राओं, अन्य व्यावसायिक उपक्रमों जैसे एसओ वेकेशंस, समरीन कॉफी हाउस, आर्थक्रांति बीड़ निधि लिमिटेड (निधि बैंक कंपनी) में निवेश, कोलकाता में दो फ्लैट खरीदने और मौसुमी बिस्वास की मां के नाम पर सावधि जमा (एफडी) करने में किया गया।

ईडी ने बताया कि इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
 

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