बैंक धोखाधड़ी: ED ने सुब्बैया कोर्रापाटी की 2.91 करोड़ की चार बेनामी संपत्तियों पर कस दिया शिकंजा

बैंक धोखाधड़ी मामला: ईडी ने सुब्बैया कोर्रापाटी की 2.91 करोड़ की चार अचल संपत्तियां कुर्क कीं


हैदराबाद, 31 जनवरी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने एक बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 2.91 करोड़ रुपये मूल्य की चार अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। यह मामला सुब्बैया कोर्रापाटी द्वारा की गई कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़ा है। कुर्क की गई संपत्तियां कृषि भूमि, आवासीय प्लॉट और एक वाणिज्यिक संपत्ति के रूप में हैं, जो सुब्बैया कोर्रापाटी के सहयोगियों के नाम पर दर्ज हैं।

ईडी ने यह जांच 10 नवंबर 2020 को दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी), हैदराबाद द्वारा भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत सुब्बैया कोर्रापाटी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई थी।

एफआईआर के अनुसार, सुब्बैया कोर्रापाटी ने सिंडिकेट बैंक, चंदनागर शाखा से फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट और अस्तित्वहीन वर्क ऑर्डर प्रस्तुत कर 10 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधाएं धोखाधड़ी से प्राप्त कीं। इस मामले में एसीबी ने चार्जशीट संख्या 03/2023, दिनांक 21 अप्रैल 2023, XXI एसीएमएम-सह-विशेष जेएमएफसी (सीबीआई मामले), हैदराबाद की अदालत में दाखिल की है।

चार्जशीट के अनुसार, सुब्बैया कोर्रापाटी ने अन्य लोगों के साथ मिलीभगत कर फर्जी संपत्ति दस्तावेजों को गिरवी रखकर कुल 12.30 करोड़ रुपये की ऋण सुविधाएं हासिल कीं। बाद में ऋण की अदायगी नहीं की गई, जिससे बैंक को 12.30 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ और आरोपी को समान रूप से अवैध लाभ प्राप्त हुआ।

ईडी की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अस्तित्वहीन और गैर-परिवर्तित (नॉन-कन्वर्टेड) संपत्तियों को अत्यधिक बढ़ी-चढ़ी कीमतों पर दिखाकर ऋण लिया। जांच में यह भी पाया गया कि ऋण की राशि को निर्धारित व्यावसायिक उद्देश्य में उपयोग करने के बजाय, उसे फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्ट, नकली कच्चे माल के बिल, फंड्स की राउंड-ट्रिपिंग और नकद निकासी के जरिए अन्य सह-आरोपियों और संस्थाओं को ट्रांसफर कर दिया गया।

ईडी के अनुसार, सुब्बैया कोर्रापाटी ने एनएसआईसी रॉ मटीरियल असिस्टेंस स्कीम के तहत बैंक गारंटी का भी दुरुपयोग किया। इसके लिए फर्जी प्रो-फॉर्मा इनवॉइस जमा किए गए और धनराशि को वापस अपने ही बैंक खातों में घुमा दिया गया।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि अपराध से अर्जित धन का उपयोग ऋण चुकाने, परियोजनाएं हासिल करने तथा व्यक्तिगत और व्यावसायिक खर्चों के लिए किया गया।

ईडी ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच जारी है।
 

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