नई दिल्ली, 31 जनवरी। भारतीय कुश्ती में सतपाल सिंह का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। सतपाल सिंह ने न सिर्फ एक पहलवान के तौर पर इस खेल में अपनी असाधारण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए वैश्विक मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि पेशेवर खिलाड़ी के रूप में संन्यास लेने के बाद अपनी कोचिंग में ऐसे पहलवानों को विकसित किया, जो दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं।
सतपाल सिंह का जन्म 1 फरवरी 1955 को दिल्ली में हुआ था। हनुमान अखाड़ा, दिल्ली में कोच गुरु हनुमान के मार्गदर्शन में उन्होंने कुश्ती दावपेंच सीखे। 16 साल तक राष्ट्रीय चैंपियन रहने वाले सतपाल सिंह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता मात्र 19 साल की उम्र में 1974 में मिली थी। 1974 में क्राइस्टचर्च में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था। इसके बाद 1978 में एलबर्टा और 1982 में ब्रिसबेन में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने रजत पदक जीता। एशियन गेम्स की बात करें तो उन्होंने 1974 में तेहरान में कांस्य पदक, 1978 में बैंकॉक में रजत पदक और 1982 में नई दिल्ली में हैवीवेट में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने 1980 के समर ओलंपिक्स में पुरुषों की फ्रीस्टाइल 100 किग्रा में हिस्सा लिया था।
सतपाल पारंपरिक कुश्ती में भी अच्छे थे। उन्होंने भारत कुमार (1973), रुस्तम-ए-हिंद (1974 और 1975), भारत केसरी (1975), रुस्तम-ए-भारत (1975), महाभारत केसरी (1976), महान भारत केसरी (1976), रुस्तम-ए-जमान (1976), हिंद केसरी (1977), भारत श्री (1978), और भारत बलराम (1979) जैसे कई खिताब जीते। सतपाल सिंह को महाबली सतपाल के नाम से भी जाना जाता है।
कुश्ती से एक खिलाड़ी के तौर पर संन्यास के बाद सतपाल सिंह कोचिंग के क्षेत्र में आए। 1988 से वह दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में पहलवानों को कुश्ती के दाव पेंच सिखाते हैं। छत्रसाल स्टेडियम में सतपाल सिंह द्वारा संचालित प्रशिक्षण केंद्र को देश में कुश्ती के हब के रूप में जाना जाता है।
सतपाल सिंह ने अपने मार्गदर्शन में देश को कई बड़े पहलवान दिए हैं। ओलंपिक में दो बार देश के लिए पदक जीतने वाले सुशील कुमार सतपाल सिंह के ही शिष्य रहे हैं। इसके अलावा ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतने वाले रवि कुमार दहिया और योगेश्वर दत्त के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन और विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाले अमित कुमार दहिया भी सतपाल सिंह के शिष्य हैं।
भारतीय कुश्ती में सतपाल सिंह का एक खिलाड़ी और कोच के रूप में योगदान अभूतपूर्व रहा है। उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा है। 1974 में भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था। 1983 में उन्हें पद्मश्री और 2009 में द्रोणाचार्य सम्मान से सम्मानित किया गया था। 2015 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था।
सतपाल सिंह 70 साल की उम्र में भी सक्रिय हैं और देश के लिए पहलवानों की बड़ी खेप तैयार करने में जुटे हैं।