क्या है तंत्र का विश्वविद्यालय? मध्य प्रदेश का रहस्यमयी चौसठ योगिनी मंदिर और 64 शिवलिंग का अद्भुत रहस्य

तंत्र का विश्वविद्यालय है रहस्ययी चौसठ योगिनी मंदिर, 64 शिवलिंग के साथ विराजमान हैं तंत्र योगिनी


नई दिल्ली, 30 जनवरी। भारत अलग-अलग मान्यताओं और परंपराओं का देश है और यही कारण है कि मंदिरों में हर देवी-देवता की पूजा अलग-अलग तरीकों से की जाती है।

आज हम ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे जिसे तंत्र का विश्वविद्यालय कहा जाता है और ये अनोखा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जहां एक नहीं बल्कि 64 शिवलिंग स्थापित हैं। यह रहस्यमयी मंदिर मध्य प्रदेश के मुरैना में स्थापित है, जिसे विश्व धरोहर घोषित किया जा चुका है।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से 40 किलोमीटर और मुरैना जिले के पडावली के पास भगवान शिव को समर्पित मंदिर है, जिसे चौसठ योगिनी मंदिर के नाम से जाना जाता है। स्थानीय लोग मंदिर को एकट्टसो महादेव मंदिर के नाम से भी जानते हैं।

मंदिर की वास्तुकला से लेकर बनावट बाकी मंदिरों से काफी अलग है। जहां हर मंदिर का शिखर या गोपुरम होता है, वहीं चौसठ योगिनी मंदिर समतल और गोल छत की तरह बना है, जो कई खंभों पर टिका है। मंदिर के बीच 64 कक्ष बने हैं, जिन्हें चौसठ योगिनियों का प्रतिरूप माना गया है और हर कक्ष में भगवान शिव का एक शिवलिंग स्थापित है।

रात के समय मंदिर में प्रवेश की अनुमति भी नहीं दी जाती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर आज भी भगवान शिव और चौसठ योगिनी के तंत्र कवच से ढका है और रात के समय मंदिर में जाना खतरे से खाली नहीं होता। रात के समय तंत्र और साधना करने वाले तांत्रिक पूजा-पाठ के लिए आते हैं।

कहा जाता है कि मंदिर कभी सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष और गणित में शिक्षा प्रदान करने वाला स्थान हुआ करता था, इसलिए मंदिर को तंत्र का विश्वविद्यालय भी कहा जाता है।

माना जाता है कि सदियों से मंदिर में तंत्र और साधना की शिक्षा दी गई। चौसठ योगिनियों को तंत्र की देवी माना जाता है और उन्हें पूर्ण करने के लिए भगवान शिव की स्थापना भी की गई है। खास बात ये भी है कि मंदिर की संरचना इस प्रकार है कि कई भूकंप के झटके झेलने के बाद भी यह सुरक्षित है।

मंदिर पहाड़ी के पास बना है, तो मंदिर तक पहुंचने के लिए 200 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है। मंदिर के बीचोंबीच एक बड़ा और खुला मंडप भी है, जहां एक बड़ा शिवलिंग स्थापित है। माना जाता है कि मंदिर के निर्माण के बाद बड़े शिवलिंग को ही मुख्य शिवलिंग के रूप में पूजा जाता था। लेकिन, आक्रमणकारियों के हमले के बाद मंदिर की हालत जर्जर है।
 
Similar content Most view View more

Latest Replies

Forum statistics

Threads
16,711
Messages
16,748
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top