गुजरात CM ने आनंद को दी 234 करोड़ की 49 जन कल्याणकारी परियोजनाओं की सौगात, बदलेगी जिले की तस्वीर

गुजरात के मुख्यमंत्री ने आनंद में 234 करोड़ रुपए की 49 परियोजनाओं का शुभारंभ किया


आनंद, 30 जनवरी। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शुक्रवार को खंभात में 234.01 करोड़ रुपए की 49 जन कल्याणकारी विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उनका उद्घाटन किया। इससे आनंद जिले में बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास को नई गति मिली है।

चकडोल मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि विकास अंतिम नागरिक तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं केवल इमारतें या संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि ऐसे मील के पत्थर हैं जो आनंद जिले के लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएंगे।

इन परियोजनाओं में सड़क एवं भवन विभाग के अंतर्गत 13 राज्य स्तरीय और 12 पंचायत स्तरीय परियोजनाएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य संपर्क को मजबूत करना और परिवहन बुनियादी ढांचे में सुधार करना है। शेष परियोजनाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, शहरी विकास और जल संसाधन क्षेत्रों से संबंधित हैं।

इस पहल को शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी विकास का “त्रिवेणी संगम” बताते हुए पटेल ने कहा कि मानव संसाधन विकास राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है।

शहरी विकास और शहरी आवास विभाग के अंतर्गत 10 परियोजनाएं स्थानीय नगरपालिकाओं की क्षमता बढ़ाएंगी। शिक्षा विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच में सुधार लाने के लिए नए स्कूलों और कक्षाओं के निर्माण सहित पांच परियोजनाएं लागू करेगा।

मुख्यमंत्री ने चार स्वास्थ्य परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया, जो चिकित्सा अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर सरकार के फोकस को रेखांकित करता है।

इसके अतिरिक्त, नर्मदा, जल संसाधन और जल आपूर्ति विभाग के अंतर्गत पांच परियोजनाओं से क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल संबंधी चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान मिलने की उम्मीद है।

अपने संबोधन में पटेल ने कम उम्र में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि कृषि में रासायनिक कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है, क्योंकि ये पदार्थ भोजन के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हम आने वाली पीढ़ी के लिए एक स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो हमें अपनी मिट्टी और अपने स्वास्थ्य दोनों की रक्षा करनी होगी। उन्होंने किसानों से रासायनिक मुक्त प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का आग्रह किया।

उन्होंने खंभात के पारंपरिक पतंग उद्योग की कारीगरी और वैश्विक पहचान की भी प्रशंसा की।
 

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