बजट 2026: जामनगर के ब्रास उद्योग की आस, GST कटौती और सस्ता कर्ज देगा 'ब्रास सिटी' को विश्व पहचान

जीएसटी में कटौती और सस्ता कर्ज—बजट से जामनगर ब्रास उद्योग की प्रमुख अपेक्षाएं


जामनगर, 30 जनवरी। गुजरात का जामनगर शहर लंबे समय से ‘ब्रास सिटी’ के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। अब इस पहचान को मजबूत करने के लिए यहां के उद्योगपतियों को आगामी 'केंद्रीय बजट 2026' से बड़ी उम्मीदें हैं।

जामनगर में लगभग 8,000 से अधिक छोटी-बड़ी ब्रास इकाइयां संचालित हैं, जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से दो लाख से अधिक लोगों को रोजगार के उपलब्ध कराती हैं। देश-विदेश में पीतल के पुर्जों की मांग को देखते हुए स्थानीय उद्योगपतियों का मानना है कि यदि बजट में सही नीतिगत फैसले लिए गए तो जामनगर न केवल भारत, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा ब्रास हब बन सकता है।

उद्योगपतियों और व्यापारिक संगठनों, विशेषकर जामनगर फैक्ट्री ऑनर्स एसोसिएशन, की प्रमुख मांगों में सबसे अहम जीएसटी दरों में कटौती है। व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में ब्रास उत्पादों और विशेष रूप से ब्रास स्क्रैप पर जीएसटी की दर काफी अधिक है, जिससे छोटे उद्योगों की कार्यशील पूंजी पर नकारात्मक असर पड़ता है।

उनका तर्क है कि ऊंची जीएसटी दरों के कारण भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में चीन जैसे देशों के मुकाबले कमजोर पड़ जाते हैं। इसके अलावा, जामनगर की अधिकांश इकाइयां एमएसएमई श्रेणी में आती हैं, ऐसे में उद्योगपति आसान ऋण, कम ब्याज दर और ब्याज सब्सिडी जैसी राहत की भी मांग कर रहे हैं।

फैक्ट्री ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रामजी भाई ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि ब्रास उद्योग को मजबूती देने के लिए कैपिटल गेन टैक्स में कमी बेहद जरूरी है।

उन्होंने बताया कि ब्रास पार्ट के कच्चे माल पर एक प्रतिशत टीसीएस लगता है, जो उद्योग के लिए उचित नहीं है। उन्होंने डॉलर को स्थिर रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यदि डॉलर स्थिर रहता है तो कारोबार में मुनाफा संभव है और इसके लिए सरकार को ठोस प्रयास करने चाहिए।

वहीं, फैक्ट्री ऑनर्स एसोसिएशन के सचिव मेहुल जोबनपुत्रा ने बताया कि जामनगर में करीब 8,000 ब्रास कंपोनेंट यूनिट्स हैं, जो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन कर रही हैं। इस बजट से सबसे बड़ी उम्मीद जीएसटी को लेकर है। वर्तमान में ब्रास पर 18 प्रतिशत जीएसटी लग रहा है, जिसे यदि 5 प्रतिशत कर दिया जाए तो बोगस बिलिंग पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। बोगस बिलिंग से न केवल उद्योग को नुकसान होता है, बल्कि सरकार को भी राजस्व का नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में उद्योग को उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में राहत देगी।

ब्रास उद्योग से जुड़े कारोबारी कांतिलाल सोरठिया ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि जामनगर में सुई से लेकर स्पेस तक उपयोग होने वाले पुर्जों का निर्माण किया जाता है। उन्होंने बताया कि सेल्फ डिफेंस सिस्टम, ऑटोमोबाइल, एक्सयूवी, विमान और यहां तक कि स्पेस सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण ब्रास और अन्य मेटल के पार्ट्स जामनगर में ही बनते हैं।

उनका कहना है कि जिस तरह चीन में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीतियां बनाई गई हैं, वैसा माहौल भारत में भी तैयार किया जाना चाहिए, ताकि घरेलू उद्योग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
 
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