ईडी ने तेलंगाना में अटैच की गई संपत्तियां पीएनबी को लौटाईं

ईडी ने तेलंगाना में अटैच की गई संपत्तियां पीएनबी को लौटाईं


हैदराबाद, 30 जनवरी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को लगभग 2.55 करोड़ रुपए मूल्य की पांच अचल संपत्तियां वापस करने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर दी है।

ये संपत्तियां एम/एस घनश्यामदास जेम्स एंड ज्वेल्स और उसके मैनेजिंग पार्टनर संजय अग्रवाल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच के दौरान अटैच की गई थीं। इन संपत्तियों में तेलंगाना के रंगा रेड्डी और मेडक जिलों में स्थित एक प्लॉट और कृषि भूमि शामिल हैं। वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार ये संपत्तियां करीब 16 करोड़ रुपए की हैं।

यह मामला 2011 का है, जब सीबीआई की बैंगलोर ब्रांच ने 19 अक्टूबर 2011 को एम/एस घनश्यामदास जेम्स एंड ज्वेल्स और उसके पार्टनर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जांच में पता चला कि संजय अग्रवाल ने कथित तौर पर जाली बैंक गारंटी के आधार पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को धोखे से 250 किलोग्राम सोना जारी करने के लिए प्रेरित किया था।

जब यह धोखाधड़ी सामने आई, तो संजय अग्रवाल और उसके भाई अजय कुमार और विनय कुमार ने हैदराबाद के आबिड्स इलाके में स्थित अपनी दुकान से पूरा सोने का स्टॉक हटा दिया और उसे स्थानीय बाजार में नगद में बेच दिया। यह सोना पीएनबी के पास गिरवी रखा हुआ था।

ईडी की जांच में आगे पता चला कि इस अपराध से मिली कमाई को संजय अग्रवाल ने दिसंबर 2012 में अपनी पत्नी के नाम पर नई फर्म खोलकर निवेश किया। बाद में उसने अपने भाइयों और एक कर्मचारी के नाम पर तीन और फर्में खोलीं। परिवार के सदस्यों और नियंत्रित फर्मों के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में बिना हिसाब-किताब वाली नकद जमा राशि मिली।

संजय अग्रवाल ने 'श्रीकांत गुप्ता' नाम से फर्जी पहचान पर पासपोर्ट बनवाया और कई बार विदेश यात्रा की। उसने अवैध कमाई छिपाने के लिए कई बैंक खाते भी खोले। जांच में एक कर्मचारी अविनाश सोनी के नाम पर बेनामी संपत्ति भी सामने आई।

ईडी ने 11 फरवरी 2022 को संजय अग्रवाल को गिरफ्तार किया था और उसके परिवार तथा बेनामी लोगों की 9 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया। 11 अप्रैल 2022 को ईडी ने हैदराबाद के नामपल्ली स्थित स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की। पीएनबी को धोखाधड़ी का शिकार होने के कारण पीएमएलए की धारा 8 (8) के तहत संपत्ति वापस मिलने का हक था। ईडी ने कोर्ट में रेस्टीट्यूशन के लिए सहमति दी ताकि अटैच संपत्तियां पीएनबी को सौंपी जा सकें।

19 जनवरी 2026 को स्पेशल पीएमएलए कोर्ट, नामपल्ली ने पीएनबी की याचिका मंजूर कर ली और अटैच की गई पांच संपत्तियों को वापस करने की अनुमति दे दी। ईडी ने इस प्रक्रिया को पूरा करके बैंक को संपत्तियां सौंप दीं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में पीड़ित संस्थाओं को न्याय दिलाने का एक बड़ा उदाहरण है।

ईडी ने कहा कि जांच के दौरान अपराध की कमाई को ट्रेस करना और उसे जब्त करना उसके मुख्य लक्ष्यों में शामिल है। इस मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य बेनामी संपत्तियों का भी पता लगाया जा रहा है।
 
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