बेंगलुरु, 30 जनवरी। कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को सीमित करने के विकल्प पर विचार कर रही है, क्योंकि इसमें कई जोखिम शामिल हैं। ग्रामीण विकास और पंचायत राज, आईटी और बीटी मंत्री प्रियांक खड़गे ने विधानसभा में यह बयान दिया।
इससे पहले वरिष्ठ भाजपा विधायक एस. सुरेश कुमार ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी और सरकार से इस दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया था।
मंत्री खड़गे ने कहा, “वरिष्ठ नेता द्वारा उठाया गया मुद्दा बहुत गंभीर है। फिनलैंड ने इस संबंध में फैसला लिया है, यूके भी इसी तरह के उपायों पर विचार कर रहा है और ऑस्ट्रेलिया ने दो महीने पहले बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाई थी। हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल के बारे में भी चर्चा कर रहे हैं कि क्या कदम उठाने की जरूरत है। इस मामले पर अभी विचार चल रहा है।”
प्रियांक खड़गे ने कहा, “सोशल मीडिया का समय से पहले इस्तेमाल करने की वजह से हम अपने बच्चों को खो रहे हैं। गोवा राज्य ने भी इस संबंध में कुछ कदम उठाए हैं। हो सकता है कि हम इसे पूरी तरह नियंत्रित न कर पाएं, लेकिन हमें कुछ कदम उठाने ही होंगे।”
दरअसल भाजपा विधायक एस. सुरेश कुमार ने कहा कि ऐसे फैसले राजनीतिक दलों की लाइन से ऊपर उठकर लिए जाने चाहिए। दुर्भाग्य से, राजनीतिक पार्टियों के बीच बहस और जवाबी बहस के कारण, आम लोगों से जुड़े मुद्दों जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा पर चर्चा नहीं हो पाती। विधानसभा के सामने से गुजरने वाला आम आदमी सोचता है कि क्या कभी उसके बारे में चर्चा होगी।”
उन्होंने आगे कहा, “यह एक गंभीर सवाल है कि क्या आम नागरिक यहां बहस का हिस्सा हैं। सरकार गवर्नर से सदन को ‘मेरी सरकार’ कहकर संबोधित करवाती है। अगर सच में ठीक तरह से शासन किया जाए, तो आम आदमी कहेगा कि यह ‘मेरी सरकार’ है। तब तक सिस्टम बेकार हो जाता है।”