यूजीसी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस से सियासत गरमाई, विपक्ष ने की तत्काल समीक्षा की मांग

यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट के रोक को लेकर विपक्ष की मांग, समीक्षा होनी चाहिए


नई दिल्ली, 29 जनवरी। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया। अब इसको लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "मुझे आज ही विरोध प्रदर्शनों के बारे में पता चला है। मैं इस मामले को देखूंगा। अभी हमारा ध्यान बजट पर है। हम इन मामलों को लेकर चिंतित हैं। यूजीसी के मुद्दे की मैं इसकी समीक्षा करूंगा और ज्यादा जानकारी मिलने के बाद ही टिप्पणी करूंगा।"

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लोकसभा सांसद अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "हम सबका मानना है कि दोषी बचे न और किसी निर्दोष के अन्याय न हो। इससे पहले भी 2012 में यूजीसी को लेकर रेगुलेशन आए थे। उसमें क्या कमी रही है? उस समय क्या-क्या फैसले हुए थे? इसके बाद फिर आज 2026 में नए रेगुलेशन आ गए। ऐसे में हमने 2012 के रेगुलेशन से क्या सीखा, जब हमारा संविधान कहता है कि हम कहीं पर भी भेदभाव नहीं कर सकते, लेकिन उसके बावजूद समय-समय पर भेदभाव होता रहता है?"

कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप ने कहा, "इस तरह के कानून देश में पहले से मौजूद हैं। अगर क्लैरिटी लाने की जरूरत है, तो इस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए और कोई भी फैसला लेने से पहले हर पॉइंट पर बहस होनी चाहिए।"

कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। गलत तरीके से बनाए गए या समाज को बांटने वाले नियमों को रोकना कोर्ट का कर्तव्य है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक नियम पर रोक लगाई है, और स्वाभाविक रूप से हम इस फैसले का स्वागत करते हैं।"

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यूजीसी के नए रेगुलेशन पर रोक लगा दी है और स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि तब तक 2012 के यूजीसी रेगुलेशन ही लागू रहेंगे।
 

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