राहुल गांधी का गंभीर आरोप: गुजरात में 'जहां-जहां SIR, वहां-वहां वोट चोरी', बताया सुनियोजित साजिश

गुजरात में एसआईआर को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लगाए गंभीर आरोप


नई दिल्ली, 29 जनवरी। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जहां-जहां एसआईआर, वहां-वहां वोट चोरी है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गुजरात कांग्रेस का एक पोस्ट शेयर करते हुए राहुल गांधी ने लिखा कि जहां-जहां एसआईआर, वहां-वहां वोट चोरी।

उन्होंने कहा कि गुजरात में एसआईआर के नाम पर जो कुछ किया जा रहा है, वह किसी भी तरह की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, यह सुनियोजित, संगठित और रणनीतिक वोट चोरी है। सबसे चौंकाने वाली और खतरनाक बात यह है कि एक ही नाम से हजारों-हजार आपत्तियां दर्ज की गईं।

उन्होंने कहा कि चुन-चुनकर खास वर्गों और कांग्रेस समर्थक बूथों के वोट काटे गए। जहां भाजपा को हार दिखती है, वहां मतदाता ही सिस्टम से गायब कर दिए जाते हैं। यही पैटर्न आलंद में दिखा। यही राजुरा में हुआ। और अब वही ब्लूप्रिंट गुजरात, राजस्थान और हर उस राज्य में लागू किया जा रहा है जहां एसाईआर थोपा गया है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि एसआईआर को 'एक व्यक्ति, एक वोट' के संवैधानिक अधिकार को खत्म करने के हथियार में बदल दिया गया है, ताकि जनता नहीं, भाजपा तय करे कि सत्ता में कौन रहेगा। और सबसे गंभीर सच्चाई यह है कि चुनाव आयोग अब लोकतंत्र का रक्षक नहीं, बल्कि इस वोट चोरी की साजिश का मुख्य सहभागी बन चुका है।

इससे पहले गुजरात कांग्रेस ने एक्स पर जारी एक पोस्ट में कहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा वोट चोरी का खुलासा होने के बाद भाजपा ने उसका नेक्स्ट लेवल चुनाव चोरी का मॉडल अपना लिया है। चुनाव चोरी मतलब आपके वोट अधिकार की चोरी। इसका नया खेल गुजरात में सामने आया है। नियमानुसार चुनाव आयोग ने एसआईआर के बाद ड्राफ्ट लिस्ट जारी कर आपत्तियां लेना शुरू किया और 18 जनवरी अंतिम तारीख घोषित कर दी। 15 जनवरी तक गिनी-चुनी आपत्तियां आई, लेकिन असली खेल उसके बाद शुरू हुआ। षडयंत्र के तहत अचानक लाखों आपत्तियां (फॉर्म 7) जमा करा दी जाती हैं।

गुजरात कांग्रेस ने लिखा कि कल जब चुनाव आयोग द्वारा जारी 12 लाख आपत्तियों में विशेष जाति-वर्ग-क्षेत्र को निशाना बनाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर एक ही व्यक्ति के नाम से दर्जनों आपत्तियां दर्ज कराई जाती है, जिसमें नाम किसी का, हस्ताक्षर किसी के और चुनाव आयोग एकदम मूकदर्शक रहता है।

कहा कि जब मुख्य विपक्षी दल पत्र लिखकर आपत्तियों की जानकारी मांगता है, तो उसे जवाब नहीं दिया जाता, जिससे चुनाव चोरी पूरी तरह साफ जाहिर हो जाती है। क्योंकि चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी एवं जवाबदेही दोनों को सत्ता के कदमों में गिरवी रख चुका है। लेकिन चुनाव आयोग भले ही अपनी जिम्मेदारी से भागे मगर हम चुनाव आयोग को भारत के लोकतंत्र और जनता के अधिकार से खिलवाड़ नहीं करने देंगे।

'एक व्यक्ति , एक वोट' के संवैधानिक अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए सड़क से सदन तक लड़ेंगे और जब तक एक व्यक्ति का अधिकार भी खतरे में होगा तब तक शांत नहीं बैठेंगे।
 

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