UN की चेतावनी: 2026 में अफगानिस्तान में 1.44 करोड़ लोगों को नहीं मिलेंगी स्वास्थ्य सेवाएं, बच्चों-महिलाओं पर बड़ा खतरा

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान: 2026 में अफगानिस्तान में 1.44 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता होगी


काबुल, 29 जनवरी। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2026 में अफगानिस्तान में लगभग 1.44 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता होगी। स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

ओसीएचए के बयान के अनुसार, इनमें से केवल 72 लाख लोगों को ही मौजूदा कार्यक्रमों के तहत स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाने की उम्मीद है। ओसीएचए ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत वाले लोगों में 54 प्रतिशत बच्चे, 24 प्रतिशत महिलाएं और 10 प्रतिशत दिव्यांग शामिल हैं। इन जरूरतों को पूरा करने के लिए 19 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक की फंडिंग की आवश्यकता होगी।

ओसीएचए ने कहा कि वर्ष 2026 में भी अफगानिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट बना रहेगा, जहां लगभग 2.2 करोड़ लोग मानवीय सहायता पर निर्भर रहेंगे। अंतरराष्ट्रीय संगठन और गैर-सरकारी संस्थाएं अफगानिस्तान में टीकाकरण, मातृ स्वास्थ्य देखभाल और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयास तेज कर रही हैं।

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने मंगलवार को कहा कि अफगानिस्तान बच्चों में कुपोषण के सबसे गंभीर संकटों में से एक का सामना कर रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हर साल लगभग 37 लाख बच्चे तीव्र कुपोषण से जूझ रहे हैं।

अफगानिस्तान में यूनिसेफ के प्रतिनिधि ताजुद्दीन ओयेवाले ने मंगलवार को कुपोषण की रोकथाम और उपचार संबंधी नई दिशानिर्देशों के शुभारंभ के दौरान इस संकट से निपटने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के बाद से आर्थिक पतन, सूखे और मानवीय सहायता के लिए धन की कमी के चलते अफगानिस्तान में कुपोषण संकट और गंभीर हो गया है। विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के अनुसार, अफगानिस्तान के 90 प्रतिशत से अधिक परिवार पर्याप्त भोजन खरीदने में असमर्थ हैं, जिसके कारण बच्चों को भूख और पोषण की कमी से स्थायी विकासात्मक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

नई दिशानिर्देशों में कुपोषण के उपचार और रोकथाम के तरीकों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनमें सबसे गंभीर मामलों में जीवन रक्षक हस्तक्षेपों पर विशेष जोर दिया गया है। इनमें छह माह से कम उम्र के शिशुओं की देखभाल के लिए भी विस्तृत निर्देश शामिल हैं, जो बाल कुपोषण को कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यूनिसेफ ने उम्मीद जताई है कि ये संशोधित दिशानिर्देश उपचार के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करेंगे और कुपोषण संकट के बीच अफगान बच्चों की जान बचाने में मददगार साबित होंगे।

गरीबी, खाद्य असुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच और माताओं में कुपोषण जैसे कई कारण अफगानिस्तान में बच्चों के कुपोषण के लिए जिम्मेदार हैं। संकटग्रस्त ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां परिवारों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ता है और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, महिला स्वास्थ्यकर्मियों पर लगी पाबंदियों ने भी उपचार तक पहुंच को और प्रभावित किया है।
 

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