नोएडा, 29 जनवरी। नोएडा पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए लैप्स बीमा पॉलिसी के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपए ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है।
फेस-1 थाने की पुलिस ने इस मामले में तीन शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान वरुण शर्मा, मदन गुप्ता और प्रदीप वर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन, पीएनटी फोन और कॉलिंग डाटा शीट सहित ठगी में प्रयुक्त कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, यह फर्जी कॉल सेंटर पिछले छह महीने से थाना फेस-1 क्षेत्र के सेक्टर-10 में संचालित किया जा रहा था। आरोपी हर महीने अपनी लोकेशन बदल लेते थे, ताकि पुलिस की नजर से बचे रह सकें। गिरोह का मुख्य आरोपी वरुण शर्मा था, जो कॉल सेंटर का संचालन करता था और ठगी से प्राप्त रकम का बंटवारा करता था। जांच में सामने आया है कि आरोपी लोगों को फोन कर उनकी लैप्स हो चुकी बीमा पॉलिसी के पैसे वापस दिलाने का झांसा देते थे। इसके लिए वे खुद को बीमा या निवेश से जुड़ी एजेंसियों का प्रतिनिधि बताते थे।
ठगी के लिए आरोपियों ने जस्ट डायल कंपनी से डाटा खरीदा, जहां से 10 हजार रुपए में 5 हजार लोगों का डाटा लिया जाता था। इसी डाटा के आधार पर कॉलिंग कर पीड़ितों से 10,500 रुपए से लेकर 1 लाख रुपए तक की रकम इन्वेस्टमेंट या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर ठग ली जाती थी।
पुलिस ने बताया कि अब तक इस गिरोह के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में एनसीआरपी पोर्टल पर 20 से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। आरोपियों द्वारा ठगी की रकम को फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कराया जाता था। इस मामले में पुलिस ने 20 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए जमा पाए गए हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी में लगाया जाता था। मुख्य आरोपी वरुण ठगी की राशि सट्टा खिलाने वालों के खातों में ट्रांसफर करता था, जहां से 20 प्रतिशत कमीशन काटकर शेष 80 प्रतिशत रकम वापस आरोपियों को लौटा दी जाती थी। गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने इस मामले में जस्ट डायल कंपनी और उसके मालिक को भी नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली है।
पुलिस का कहना है कि डाटा की बिक्री में कंपनी की भूमिका की भी जांच की जाएगी। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ थाना फेस-1 में मुकदमा दर्ज कर लिया है। आगे की जांच जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी जल्द सामने आएंगे।