पटना, 29 जनवरी (आईएएनस)। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए रोक लगा दी है और स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
यूजीसी के नए नियम पर लगाई गई रोक को लेकर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, "यह कोर्ट का आदेश है। जब भी कोर्ट का कोई आदेश आता है तो सरकार उसके अनुसार ही काम करती है। इस पर भी उसी हिसाब से काम किया जाएगा।"
भाजपा नेता सुनील भराला ने कहा, "विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक ऐसा नियम बनाया था, जिसमें एक खास समुदाय यानी सवर्ण और उनके छात्रों को निशाना बनाते हुए बहुत आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। इस नियम का पूरे भारत में कड़ा विरोध हुआ, न सिर्फ सवर्ण समुदाय ने बल्कि समाज के सभी वर्गों के लोगों ने इसका विरोध किया।"
उन्होंने आगे कहा कि इसमें कमियां यह हैं कि जाति बताने वाले शब्दों के इस्तेमाल के बाद छात्रों के खिलाफ केस दर्ज किए जाएंगे और फिर एक कमेटी बनाई गई है जिसमें एक समुदाय उस कमेटी से जुड़े मामलों पर फैसला करेगा।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि उन्होंने यूजीसी के नए नियमों के सेक्शन 3सी को चुनौती दी है। उनका कहना था कि रेगुलेशन में भेदभाव की जो परिभाषा दी गई है, वह संविधान के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने पूरे मामले को सुनते हुए इस पर रोक लगा दी है।
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी द्वारा अजीत पवार के निधन पर दिए गए बयान को लेकर सम्राट चौधरी ने कहा, "पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता दीदी को इस मामले में राजनीति करने की जरूरत नहीं है। परिवार के लोग सरकार के साथ खड़े हैं। सरकार का साफ रुख है कि अगर कोई कमी पाई जाती है तो उसके हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।"
वहीं, लैंड-फॉर-जॉब मामले पर सम्राट चौधरी ने कहा, "हर मामले की सुनवाई एक तय समय सीमा में होनी चाहिए। कोर्ट जो भी फैसला करेगा, सरकार उसी के हिसाब से काम करेगी।"