सुप्रीम कोर्ट के नए UGC नियमों पर रोक से कांग्रेस गदगद, भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाया

कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के नए यूजीसी नियमों पर रोक लगाने के आदेश का स्वागत किया


नई दिल्ली, 29 जनवरी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 के संचालन पर रोक लगाने के फैसले पर सभी राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कांग्रेस ने इस कदम का स्वागत किया, जबकि भाजपा ने कहा कि वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करती है और उसी के अनुसार कार्रवाई करेगी।

आईएएनएस से बात करते हुए कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया।

अजय राय ने आईएएनएस से कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देना चाहता हूं। भाजपा सरकार ने समाज में विभाजनकारी राजनीति की है। पहले हिंदुओं और मुसलमानों के बीच, और अब हिंदुओं को अगड़े, पिछड़े और दलित समूहों में बांटकर उनके बीच भी विभाजन किया है। इस फैसले के लिए सुप्रीम कोर्ट निश्चित रूप से प्रशंसा का पात्र है।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी अदालत के हस्तक्षेप का स्वागत किया, लेकिन केंद्र सरकार पर सामाजिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है और मैं इसका स्वागत करता हूं। हालांकि, लोगों और समुदायों के बीच शांति बनाए रखना और संघर्षों को रोकना सरकार का कर्तव्य है। इसके बजाय, यह सरकार जाति और धर्म के आधार पर संघर्ष पैदा कर रही है और लोगों का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटका रही है।

आरएलपी सुप्रीमो और सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि सरकार पहले अनजान थी। सरकारें लापरवाही से काम नहीं करतीं और सोते हुए आदेश जारी नहीं करतीं। सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में अपने रुख का बचाव करना होगा, उससे पीछे नहीं हटना चाहिए। सरकार अपना रुख कायम रखती है या बदलती है, यह अदालत में स्पष्ट हो जाएगा। लेकिन अगर सरकार पीछे हटती है, तो इसे जनता को बांटने की कोशिश के रूप में देखा जाएगा।

समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने संवैधानिक प्रावधानों का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि संविधान के सभी अनुच्छेदों को ध्यानपूर्वक पढ़ा जाना चाहिए और उनका सही ढंग से पालन किया जाना चाहिए। उनमें संशोधन केवल वहीं किया जाना चाहिए जहां आवश्यक हो। संविधान में पहले से ही भेदभाव विरोधी मजबूत प्रावधान हैं, और इनका गहन अध्ययन किया जाना चाहिए और सही भावना से लागू किया जाना चाहिए।
 
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