हिमंता सरमा के SIR बयान से सियासी घमासान, विपक्ष बोला - संविधान और नागरिक अधिकार खतरे में

हिमंता सरमा के एसआईआर वाले बयान पर विपक्ष ने उठाए संविधान और नागरिक अधिकारों के सवाल


नई दिल्ली, 29 जनवरी। असम में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस, सीपीएम और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बयान पर प्रतिक्रिया दी है।

कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि कांग्रेस किसी खास समुदाय के लिए नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के अधिकारों के लिए काम करती है।

उन्होंने कहा, "कांग्रेस न तो बंगाली मुसलमानों के लिए अलग से काम करती है और न ही बंगाली हिंदुओं के लिए। हम सभी को देश का नागरिक मानते हैं। जो बातें पहले छुपकर की जाती थीं, अब हिमंता बिस्वा सरमा उन्हें खुले तौर पर कह रहे हैं।"

वहीं, सीपीएम सांसद अमराराम ने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर दलितों, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के वोट छीने जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, "चाहे कोई हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो, ईसाई हो या बौद्ध, सभी इस देश के नागरिक हैं। समाज में नफरत फैलाना देश, संविधान और एकता के साथ विश्वासघात है।"

समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने भी मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए कहा, "जो व्यक्ति समाज और देश को बांटने की बात करता है, उसे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं होना चाहिए।"

बता दें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 27 जनवरी को कहा था कि राज्य में चल रही एसआईआर के बाद 4 से 5 लाख 'मियां' वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।

विपक्षी दलों का आरोप है कि इसके जरिए कुछ खास वर्गों को निशाना बनाया जा रहा है। इस पूरे मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ी हुई है।

वहीं, दूसरी ओर भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, "हिमंता बिस्वा सरमा का रुख हमेशा से यह रहा है कि एसआईआर को 'मियां' लोगों के खिलाफ सख्ती से लागू किया जाना चाहिए, और 'मियां' से उनका मतलब बांग्लादेश से आने वाले अवैध मुस्लिम अप्रवासी हैं।"
 

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
1,792
Messages
1,824
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top