राष्ट्रपति अभिभाषण पर हंगामा: प्रमोद तिवारी का पलटवार- सम्मान राष्ट्रपति का, सरकार के मनरेगा पर झूठ का विरोध

संसद में हंगामे पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी का जवाब- राष्ट्रपति का सम्मान किया, विरोध सरकार से था


नई दिल्ली, 29 जनवरी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण के दौरान हंगामे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हमलों के बाद कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने पार्टी सदस्यों का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि सरकार झूठ बोल रही है और देश को गुमराह कर रही है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, "सरकार झूठ बोल रही है और देश को गुमराह कर रही है। पूरे देश ने देखा कि जब राष्ट्रपति भाषण देने के लिए खड़े हुए, तो हमने सिर्फ एक मांग की कि मनरेगा लागू करो। यह 40-50 करोड़ बेरोजगार लोगों, मजदूरों, किसानों और इस देश के आम नागरिकों की आवाज है। अगर हम यह मुद्दा राष्ट्रपति के सामने नहीं उठाएंगे, तो किसके सामने उठाएंगे?"

उन्होंने कहा कि हमने सदन का बहिष्कार नहीं किया था और न सदन के अंदर बेल में गए। हमने सिर्फ राष्ट्रपति के संज्ञान में लाने के लिए कहा कि मनरेगा को वापस लाया जाना चाहिए।

कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि हमने राष्ट्रपति के प्रति पूरी श्रद्धा और आदर दिखाया। उनका सम्मान किया। हमारा विरोध सिर्फ इस बात पर है कि राष्ट्रपति ने जो अभिभाषण दिया, वह सिर्फ सरकार का प्रस्ताव है। हमारा विरोध मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद और उस अंश से है, जहां उन्होंने मनरेगा वापस लेकर महात्मा गांधी का अपमान किया और करोड़ों लोगों को रोजगार की गारंटी छीनी।

बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण के बीच संसद में बुधवार को विपक्षी दलों ने हंगामा किया। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में 'जी राम जी' योजना की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा, "ग्रामीण इलाकों में रोजगार और विकास के लिए विकसित भारत-ग्राम कानून बनाया गया है।"

इस पर जैसे ही भाजपा-एनडीए सांसदों ने तारीफ में मेजें थपथपाईं, विपक्षी सांसद खड़े हो गए और कानून वापस लेने की मांग करते हुए विरोध जताया। हंगामे के कारण राष्ट्रपति को अपना अभिभाषण रोकना पड़ा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राष्ट्रपति के भाषण में 'वंदे मातरम' की चर्चा के दौरान भी हंगामा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समेत विपक्ष ने आदतन संसदीय मर्यादा का उल्लंघन किया। उनका कहना था कि संसद में इस तरह के व्यवधान बिल्कुल स्वीकार्य नहीं हैं और इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। विपक्ष को इस पर माफी मांगनी चाहिए।
 

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