अजित पवार के निधन पर राजनीति शर्मनाक! ममता पर बरसे जदयू प्रवक्ता, बोले- परिवार की भावनाओं को ठेस न दें

'अजित पवार के निधन को राजनीतिक रंग देना शर्मनाक', ममता बनर्जी पर भड़के जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद


पटना, 29 जनवरी। जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने ममता बनर्जी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ममता बनर्जी का अजित पवार से व्यक्तिगत या राजनीतिक संबंध रहा होगा, लेकिन इस पूरे मामले में शरद पवार की बात सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, "शरद पवार केवल अजित पवार के चाचा ही नहीं हैं, बल्कि उनके लिए पिता और मार्गदर्शक जैसे हैं। इस दुखद घटना पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। मुझे लगता है कि ममता बनर्जी के बयान का समय सही नहीं है। विपक्ष के कई नेताओं के बयान किसी न किसी तरह से परिवार की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं।"

विमान हादसे की जांच को लेकर भी जदयू नेता ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि डीजीसीए इस तरह की घटनाओं में नियमित रूप से जांच करता है और यह कोई नई बात नहीं है। यह एक ऐसा हादसा है, जिसमें देश ने एक वरिष्ठ नेता को खोया है। ऐसे में जांच होना स्वाभाविक है, लेकिन जिस तरह से पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है, वह बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है।

इसके अलावा, लैंड फॉर जॉब घोटाले पर बोलते हुए राजीव रंजन ने लालू यादव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "काफी लंबे समय से जमीन, नौकरी और आईआरसीटीसी से जुड़े मामले अदालतों में लंबित हैं। चारा घोटाले के बाद भी लालू यादव की संपत्ति में बढ़ोतरी रुक नहीं पाई है। यही वजह है कि उन्हें बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।"

संसद की कार्यवाही पर टिप्पणी करते हुए जदयू नेता ने कहा कि संसद का संचालन जनता के पैसे से होता है। लोग उम्मीद करते हैं कि संसद में गंभीर बहस और चर्चा हो। किसी भी विधेयक या मुद्दे पर जो समय तय किया गया है, उसका सही और सार्थक इस्तेमाल होना चाहिए। लेकिन जिस तरह विपक्ष टकराव और हंगामे के जरिए कार्यवाही बाधित कर रहा है, उससे देश की जनता में काफी नाराजगी है।

तमिलनाडु की राजनीति और विपक्षी गठबंधन से जुड़े सवाल पर राजीव रंजन ने कहा कि डीएमके की कनिमोझी पार्टी की दूसरी सबसे प्रभावशाली नेता हैं। स्टालिन के बाद वह न सिर्फ परिवार की अहम सदस्य हैं, बल्कि पार्टी की वरिष्ठ सांसद भी हैं। राहुल गांधी के साथ हुई बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इसके संकेत पहले ही मिल गए थे, जब कांग्रेस की तमिलनाडु इकाई के कई वरिष्ठ नेताओं ने डीएमके के सख्त रवैये की खुलकर आलोचना की थी।
 

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