अमृतसर, 29 जनवरी। पंजाब पुलिस ने नशा और अवैध हथियार तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की। पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने विलेज डिफेंस कमेटी (वीडीसी) के सहयोग से एक बड़े नार्को-आर्म्स कंसाइनमेंट का भंडाफोड़ किया है।
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 42.983 किलो हेरोइन, 4 हैंड ग्रेनेड, एक स्टार मार्क पिस्टल, .30 बोर के 46 जिंदा कारतूस और एक लावारिस मोटरसाइकिल बरामद की है। डीजीपी के अनुसार, यह हाल के दिनों में राज्य में नशा-हथियार नेटवर्क के खिलाफ की गई सबसे बड़ी बरामदगियों में से एक है।
डीजीपी गौरव यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "एक बड़ी सफलता में अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने ग्राम रक्षा समिति (वीडीसी) की मदद से नशीले पदार्थों और हथियारों की एक बड़ी खेप पकड़ी है और 42.983 किलोग्राम हेरोइन, 4 हैंड ग्रेनेड, एक स्टार मार्क पिस्तौल, 46 जिंदा .30 बोर कारतूस और एक लावारिस मोटरसाइकिल बरामद की है। इसके बाद की जांच में अमृतसर के रहने वाले 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया। फरार आरोपियों का पता लगाने, कब्जे की कड़ी की पुष्टि करने और बड़ी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए आगे की जांच जारी है। पंजाब पुलिस ड्रग्स और हथियारों के नेटवर्क को खत्म करने और पूरे पंजाब में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
गौरतलब है कि इससे पहले 27 जनवरी को भी डीजीपी पंजाब पुलिस ने एक पोस्ट में अमृतसर में क्रॉस-बॉर्डर नार्को-आर्म्स स्मगलिंग मॉड्यूल के भंडाफोड़ की जानकारी दी थी। उस कार्रवाई में अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था और उनके कब्जे से 1.5 किलोग्राम हेरोइन, दो अत्याधुनिक पिस्टल (एक 9 एमएम और एक .30 बोर), 9 एमएम के 34 जिंदा कारतूस और 1.98 लाख रुपये की ड्रग मनी बरामद की गई थी।
प्रारंभिक जांच में सामने आया था कि आरोपी विदेश में बैठे अपने हैंडलर्स के संपर्क में थे और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए पाकिस्तान स्थित तस्करों से जुड़े हुए थे। उनके निर्देश पर अवैध हथियार और हेरोइन की खेप सीमा पार से मंगाई जाती थी, जिसे बाद में पंजाब के अलग-अलग इलाकों में सप्लाई किया जाता था। इस मामले में अमृतसर के थाना सिविल लाइंस में एफआईआर दर्ज की गई थी।
पंजाब पुलिस ने यह साफ किया है कि संगठित अपराध, नशा तस्करी और अवैध हथियार नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सीमा पार से संचालित इन गिरोहों को जड़ से खत्म करने के लिए तकनीकी निगरानी, जमीनी सूचना तंत्र और स्थानीय लोगों के सहयोग को और मजबूत किया जा रहा है।