रिश्वत मामला: सीबीआई कोर्ट ने सीनियर अकाउंटेंट को सुनाई 5 साल की सश्रम कैद

रिश्वत मामला: सीबीआई कोर्ट ने सीनियर अकाउंटेंट को सुनाया 5 साल का सश्रम कैद


लखनऊ, 28 जनवरी। लखनऊ की सीबीआई विशेष अदालत ने बुधवार को रिश्वत के एक मामले में एसएसबी, अलीगंज, लखनऊ स्थित जोनल पे-एंड-अकाउंट ऑफिस के सीनियर अकाउंटेंट राम निवास वर्मा को दोषी करार देते हुए पांच साल की सश्रम कैद और एक लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।

अदालत ने यह फैसला मामले की सुनवाई पूरी होने और आरोप सिद्ध होने के बाद सुनाया।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने राम निवास वर्मा के खिलाफ 2 जुलाई 2018 को एक मामला दर्ज किया था। यह केस तीसरी बटालियन एसएसबी, लखीमपुर खीरी में तैनात एक कांस्टेबल (जीडी) की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसे एसएसबी के फोर्स हेडक्वार्टर, नई दिल्ली स्थित चीफ विजिलेंस ऑफिसर के माध्यम से सीबीआई को भेजा गया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपी सीनियर अकाउंटेंट ने कांस्टेबल के बिल और भत्ते पास करने के एवज में 4,000 रुपए की रिश्वत की मांग की थी।

मामले की जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 31 अगस्त 2018 को राम निवास वर्मा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद अदालत ने 24 मई 2019 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए और नियमित सुनवाई शुरू हुई। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने रिश्वत मांगने और लेने से जुड़े साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।

अदालत ने सभी तथ्यों, गवाहों और सबूतों पर विचार करने के बाद आरोपी को भ्रष्टाचार का दोषी पाया। इसके बाद कोर्ट ने राम निवास वर्मा को पांच साल की कैद की सजा सुनाने के साथ-साथ एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। सीबीआई ने इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में एक अहम कदम बताया है।

इससे पहले, 15 जनवरी को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने 152 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी मामले में दो निजी कंपनियों और छह व्यक्तियों को दोषी ठहराया था। अदालत ने 13 जनवरी 2026 को सजा सुनाई, जबकि दोषसिद्धि का फैसला 22 दिसंबर 2025 को दिया गया था।

यह मामला केनरा बैंक, करनाल (हरियाणा) की शिकायत पर 14 जुलाई 2020 को दर्ज किया गया था।
 

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