रांची, 28 जनवरी। झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में नगर निकायों के चुनाव अक्टूबर, 2024 की मतदाता सूची के आधार पर कराए जाने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मांग की है कि राज्य में नगर निकाय चुनाव अपडेट मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएं, ताकि किसी भी पात्र मतदाता को उसके संवैधानिक अधिकार से वंचित न होना पड़े।
मरांडी ने कहा कि उन्हें यह जानकारी मिल रही है कि राज्य सरकार ने नगर निकाय चुनाव अक्टूबर 2024 की मतदाता सूची के आधार पर कराने की तैयारी की है। यह वही मतदाता सूची है, जिसके आधार पर विधानसभा चुनाव संपन्न कराए गए थे। इसका सीधा अर्थ यह होगा कि 1 अक्टूबर 2024 के बाद मतदाता सूची में जुड़े नए मतदाता तथा वे मतदाता, जिन्होंने अपना नाम एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कराया है, नगर निकाय चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस स्थिति में पिछले करीब 15 महीनों के दौरान मतदाता सूची में शामिल हुए हजारों नए मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो जाएंगे। इसके साथ ही ऐसे मतदाता, जिन्होंने आवासीय परिवर्तन के कारण नामांतरण कराया है, वे भी अपने-अपने नगर निकाय क्षेत्र में मतदान नहीं कर पाएंगे।
उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध बताया है। मरांडी ने कहा कि यह सर्वविदित है कि मतदाता सूची का वार्षिक और अर्द्धवार्षिक पुनरीक्षण नियमित रूप से किया जाता है। इसके बावजूद यदि पुरानी मतदाता सूची के आधार पर नगर निकाय चुनाव कराए जाते हैं, तो यह न केवल चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन भी है।
मरांडी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित करना गंभीर अन्याय की श्रेणी में आता है। शहर की सरकार चुनने की प्रक्रिया में प्रत्येक पात्र मतदाता की भागीदारी सुनिश्चित करना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई गई, तो यह मुद्दा राज्यव्यापी आंदोलन का रूप भी ले सकता है।
उल्लेखनीय है कि राज्य के 48 नगर निकायों में चुनाव की प्रक्रिया 28 जनवरी से शुरू हो गई है। सभी जिलों में इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके अनुसार, 23 फरवरी को मतदान कराए जाएंगे, जबकि 27 फरवरी को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।