सरकार केंद्रीय बजट 2026-27 में पूंजीगत व्यय में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकती है : एसबीआई रिपोर्ट

सरकार केंद्रीय बजट 2026-27 में पूंजीगत व्यय में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकती है: एसबीआई रिपोर्ट


नई दिल्ली, 28 जनवरी। सरकार आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) को बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपए से अधिक कर सकती है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। बुधवार को जारी एसबीआई की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस बढ़े हुए खर्च से सरकार हाईवे, रेलवे, बंदरगाह और बिजली जैसे बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ा सकेगी, जिससे देश में आर्थिक विकास को रफ्तार मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 का बजट ऐसे समय में आ रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता और बिखराव से जूझ रही है। ऐसे में जरूरी है कि भारत वित्तीय अनुशासन के रास्ते पर बना रहे, क्योंकि वैश्विक कर्ज मौजूदा आर्थिक व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद भारत की आर्थिक रिकवरी वैश्विक वित्तीय संकट के बाद की रिकवरी से भी बेहतर रही है।

एसबीआई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2027 में कर राजस्व में थोड़ी बढ़ोतरी होगी, जबकि गैर-कर राजस्व लगभग स्थिर रह सकता है।

बजट गणना के लिए नॉमिनल जीडीपी वृद्धि करीब 10.5 से 11 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक महंगाई दर पर पड़ सकता है।

इसी आधार पर वित्त वर्ष 2027 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का करीब 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, नई जीडीपी शृंखला आने से यह गणना बदल भी सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की उधारी को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। वित्त वर्ष 2027 में केंद्र सरकार की शुद्ध उधारी करीब 11.7 लाख करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है, जबकि 4.87 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा।

वहीं, राज्य सरकारों की कुल उधारी लगभग 12.6 लाख करोड़ रुपए और भुगतान 4.2 लाख करोड़ रुपए रह सकता है। एसबीआई का कहना है कि इन जरूरतों को संतुलित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को और ज्यादा ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) करने पड़ सकते हैं।

एसबीआई रिपोर्ट में सरकार को सलाह दी गई है कि बजट में वित्तीय बचत बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएं, जिनमें बैंक जमा पर मिलने वाले ब्याज पर कर व्यवस्था को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) और अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (एसटीसीजी) के बराबर कर व्यवस्था, टैक्स बचत वाली फिक्स्ड डिपॉजिट की लॉक-इन अवधि को म्यूचुअल फंड की ईएलएसएस (3 साल) के बराबर करना, और बैंक जमा में बचत पर टीडीएस के लिए ब्याज की सीमा बढ़ाना शामिल है।

अप्रत्यक्ष करों (इनडायरेक्ट टैक्स) के मामले में रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर की परिभाषा में बदलाव किया जाए, ताकि भ्रम कम हो और कानूनी विवाद घटें।

इसके अलावा, बैंकिंग सेवाओं पर टीडीएस के लिए जीएसटी लागू न करने की भी सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में बीमा और पेंशन सेक्टर में भी कई सुधारों की जरूरत बताई गई है, ताकि इन सेवाओं का दायरा ज्यादा लोगों तक पहुंच सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकारों पर कुल सरकारी कर्ज का बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए राज्य बजट में मध्यम अवधि की कर्ज योजना साफ तौर पर बताई जानी चाहिए।

यह योजना राज्य की आय (जीएसडीपी) और विकास की जरूरतों के हिसाब से होनी चाहिए, न कि सिर्फ सालाना घाटे के लक्ष्य पर आधारित।

एसबीआई ने सुझाव दिया है कि केंद्रीय बजट में इस विषय को खासतौर पर उजागर किया जाना चाहिए।
 

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