नई दिल्ली, 28 जनवरी। आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने बुधवार को कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था का तेजी से आगे बढ़ना एक दुर्लभ मामला है और देश ऐसे समय पर आर्थिक स्थिरता दिखा रहा है, जब दुनिया राजनीतिक अस्थिरता, व्यापारिक नियमों और वैश्विक संबंधों में एक बड़ा बदलाव देख रही है।
अपने ‘वार्षिक चिंतन’ नोट के सातवें संस्करण में, बिड़ला ने कहा कि वैश्विक वातावरण अस्थिर बना हुआ है, फिर भी भारत की अर्थव्यवस्था लगातार स्थिरता और मजबूती दिखा रही है।
उन्होंने इस नोट को एक व्यक्तिगत अभ्यास बताया और इसे दुनिया, अपने काम और अपने बदलते विचारों पर चिंतन करने के लिए एक 'अनुशासित विराम' कहा।
उन्होंने इसे अपने 'मन का लेखा-जोखा' बताया, जिसमें वे वैश्विक परिवर्तनों, भारत के आर्थिक उत्थान, आदित्य बिड़ला समूह की यात्रा और दीर्घकालिक रूप से व्यवसाय स्थापित करने से मिले अनुभवों का आकलन करते हैं।
उन्होंने नोट में कहा, “वैश्विक राजनीति अब निश्चित नियमों से निर्देशित नहीं होती, बल्कि निरंतर वार्ताओं और समझौतों से संचालित होती है।"
बिड़ला ने कहा,“दुनिया अब एक भू-राजनीतिक बाजार की तरह काम करती है, जहां ऊर्जा क्षेत्र में आज के साझेदार प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोगी नहीं हो सकते, और आज के मित्र कल एक जैसी प्राथमिकताएं साझा नहीं कर सकते।”
बिड़ला ने समझाया कि इससे देशों और व्यवसायों दोनों के लिए निर्णय लेना अधिक जटिल हो गया है और पहले की तुलना में विकल्प कम पूर्वानुमानित हैं।
बिड़ला ने आगे कहा कि इस वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद, भारत की आर्थिक गति मजबूत और स्थिर बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि भारत की वृद्धि उसकी विशाल जनसंख्या, तेजी से हो रहे बुनियादी ढांचे के विस्तार, अर्थव्यवस्था के बढ़ते औपचारिकरण और लोगों और व्यवसायों में बढ़ती महत्वाकांक्षा से प्रेरित है।
उन्होंने कहा, “ऐसी दुनिया में जहां बड़े पैमाने पर कारोबार और सौदेबाजी पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, भारत आकार, विश्वसनीयता और निरंतरता प्रदान करता है।”
आदित्य बिड़ला समूह की यात्रा पर बिड़ला ने कहा कि यह समूह भारत के साथ-साथ न केवल विकास का लाभार्थी बनकर, बल्कि एक सक्रिय योगदानकर्ता बनकर भी विकसित हुआ है।
बिड़ला ने कहा, “समूह का हमेशा से यही लक्ष्य रहा है कि वह जिस राष्ट्र की सेवा करता है, उसके साथ कदम मिलाकर विस्तार करे।”
बिड़ला ने पिछले एक दशक में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को दिए गए ऋण में हुई तीव्र वृद्धि पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि जहां देश में एमएसएमई को दिए गए लोन में पिछले 10 वर्षों में तीन गुना वृद्धि हुई है, वहीं आदित्य बिड़ला समूह की एनबीएफसी लोन बुक इसी अवधि में लगभग 17,000 करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए की हो गई है।