IGL अधिकारी बन साइबर ठगी: दिल्ली पुलिस ने खतरनाक ऐप से लूटने वाले गिरोह का किया भंडाफोड़, 3 दबोचे

दिल्ली पुलिस ने आईजीएल अधिकारी बनकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया, 3 आरोपी गिरफ्तार


नई दिल्ली, 28 जनवरी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े संगठित साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इंटर स्टेट सेल ने इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के अधिकारियों का रूप धारण करने वाले ठगों के मॉड्यूल को ध्वस्त कर दिया। इस ऑपरेशन में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस ने बताया कि आरोपी खुद को आईजीएल के प्रतिनिधि बताकर लोगों को फोन करते थे। वे पीड़ितों को डराते-धमकाते या लालच देकर एक खतरनाक मोबाइल ऐप्लिकेशन (मैलिशियस एपीके फाइल) इंस्टॉल करवाते थे। इस ऐप के जरिए ठगों को पीड़ितों के बैंक खातों और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच मिल जाती थी, जिससे वे आसानी से पैसे निकाल लेते थे या ट्रांसफर कर देते थे।

इस गिरोह के तीन मुख्य आरोपी हैं - बिक्की मंडल उर्फ विक्की (22 वर्ष, निवासी आसनसोल, पश्चिम बंगाल), सुमित कुमार सिंह (26 वर्ष, निवासी जामताड़ा, झारखंड) और राजीव कुमार मंडल (22 वर्ष, निवासी जामताड़ा, झारखंड)। इनकी गिरफ्तारी दर्ज प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319 और 3(5) लगाई गई है। यह मामला क्राइम ब्रांच थाने, दिल्ली से दर्ज है।

एक उदाहरण में इन ठगों ने एक 61 वर्षीय सेवानिवृत्त सेना अधिकारी को ठगा। आरोपी ने आईजीएल अधिकारी बनकर उनसे संपर्क किया और फर्जी ऐप इंस्टॉल करवा दिया। इससे पीड़ित को 91,449 रुपये का नुकसान हुआ। जांच में पता चला कि गिरोह कई डिवाइस और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहा था। गिरफ्तारी के समय आरोपियों से कुल नौ मोबाइल फोन बरामद हुए। इनमें से सात फोन से डिजिटल फोरेंसिक जांच में कई फर्जी ऐप मिले, जो आईजीएल, एसबीआई, आरटीओ चालान और टाटा पावर जैसे नामी संस्थानों का रूप धारण करते थे।

पुलिस ने आगे बताया कि ये आरोपी नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरसीपी) पर दर्ज 35 शिकायतों से जुड़े पाए गए हैं। यह उनकी आदतन अपराध करने की ओर इशारा करता है। बिक्की मंडल पहले भी पश्चिम बंगाल के आसनसोल में साइबर फ्रॉड के एक मामले में शामिल था। सुमित कुमार सिंह के खिलाफ झारखंड में धोखाधड़ी और अन्य गंभीर मामलों में पुरानी प्राथमिकी दर्ज हैं। राजीव कुमार मंडल भी सह-आरोपियों के साथ मिलकर सक्रिय था।

पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) आदित्य गौतम ने कहा कि जांच जारी है। डिजिटल ट्रेल की गहन जांच से और पीड़ितों की पहचान, ठगी की रकम बरामदगी और गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है। लोगों से अपील है कि किसी अनजान नंबर से आए कॉल पर ऐप इंस्टॉल न करें और संदेह होने पर तुरंत 1930 पर रिपोर्ट करें।
 

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