बांग्लादेश चुनाव में अमेरिकी सॉफ्ट पावर की कमी से बढ़ती अनिश्चितता और भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव: सीनेटर वार्नर की चेतावनी

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वॉशिंगटन, 28 जनवरी। अमेरिका के एक सीनियर लॉमेकर ने कहा है कि बांग्लादेश के आने वाले चुनावों को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है। अमेरिका की भागीदारी कम होने से लोकतांत्रिक समर्थन कमजोर हो रहा है। इससे देश में राजनीतिक स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसका सीधा-सीधा असर भारत के क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल पर पड़ता है।

सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के अध्यक्ष मार्क वार्नर ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में बताया कि 12 फरवरी को बांग्लादेश में होने वाले आम चुनाव फ्री या निष्पक्ष होंगे या नहीं, इसके बारे में मुझे कुछ भी पता नहीं है।

वार्नर ने कहा कि जमीन पर अमेरिका का असर कम हो गया है। ट्रंप प्रशासन द्वारा विकासशील देशों को आर्थिक विकास और मानवीय सहायता बंद करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकन सॉफ्ट पावर और सहायता के खत्म होने से अब हमारे रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के शॉर्ट-टर्म केयरटेकर के तौर पर उभरने के बाद हम सभी बदलाव की उम्मीद लगाए हुए थे। वह उम्मीद अब खत्म हो गई है। बांग्लादेश में युवाओं को राज करना मुश्किल लग रहा है।

वार्नर ने कहा कि मुझे पक्का नहीं पता कि बांग्लादेश की तरफ से कितना गुस्सा है, क्योंकि मेरा मानना है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने अभी भी भारत में शरण ली है। इससे क्षेत्रीय स्थिरता मुश्किल में है। हालांकि अनिश्चितता के बावजूद, मुझे बांग्लादेश में आजाद चुनाव की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश राजनीति के अलावा भी कई दबावों का सामना कर रहा है, जिसमें गरीबी, आर्थिक तनाव और पर्यावरण के जोखिम प्रमुख हैं।

वार्नर ने उग्रवाद पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हमने बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा को बहुत ज्यादा नहीं देखा है। अलग-अलग घटनाओं से देश की दिशा तय नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "भारत एक खतरनाक पड़ोस में रहता है। बांग्लादेश, म्यांमार और पाकिस्तान की चुनौती भारत में शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं।

सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के अध्यक्ष ने कहा कि अमेरिका की ताकत सिर्फ उसकी मिलिट्री और बिजनेस से नहीं आई। दशकों तक, अमेरिका का असर विकास और लोकतंत्र बनाने की कोशिशों से भी आता रहा है। आप आर्थिक विकास और लोकतंत्र बनाने में कैसे मदद करते हैं, इस पर सॉफ्ट पावर ने एक बड़ी भूमिका निभाई।

वार्नर ने कहा कि उन कार्यक्रमों में कटौती से बांग्लादेश जैसे देशों में अमेरिका का असर कम हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि सेंसिटिव पॉलिटिकल बदलावों के दौरान आपसी जुड़ाव में दूरी आ सकती है।

उन्होंने कहा कि लगातार अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव जरूरी है। लोकतांत्रिक संस्थाओं को लंबे समय तक समर्थन की जरूरत है, न कि कभी-कभी ध्यान देने की। बांग्लादेश में हो रहे विकास दक्षिण एशिया में बड़े भूराजनीतिक कॉम्पिटिशन से भी जुड़े हैं। हाल के सालों में बांग्लादेश में बड़े राजनीतिक बदलाव हुए हैं। इसके चुनावों पर पड़ोसियों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की करीबी नजर रहती है।

भारत के लिए, बांग्लादेश में स्थिरता का सीधा असर पड़ता है। दोनों देशों के बीच एक लंबा बॉर्डर, गहरे व्यापार संबंध और पूर्वी इलाकों में माइग्रेशन और क्षेत्रीय असर से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं हैं।
 
मोहम्मद यूनुस से जो उम्मीदें थीं, वे धुंधली होती दिख रही हैं। लेख पढ़कर लगता है कि बांग्लादेश में 'पावर वैक्यूम' बन रहा है। युवाओं के लिए राजनीति में जगह न होना और आर्थिक दबाव बढ़ना किसी भी देश के लिए खतरे की घंटी है। उम्मीद है कि चुनाव निष्पक्ष हों।
 

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